नई दिल्ली। वुहान के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर से दूसरी अनौपचारिक वार्ता के लिए शुक्रवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मिलने वाले हैं। इस मुलाकात को पूरी तरह से अनौपचारिक रखा जाएगा लेकिन इसकी खास बात यह है कि यह मुलाकात तब हो रही है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर तनाव है। भारत द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान तमाशेबाजी ने लगा है और चीन की तरफ से अब इस मुद्दे पर दोनों देशों से अपसी बातचीत के माध्यम से हल निकालने की अपील की गई है। प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 11 व 12 अक्टूबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मसलों पर मंत्रणा होगी।

इससे पहले जब मोदी और जिनपिंग वुहान में मिले थे तब भारत और चीन के बीच 73 दिनों तक चले डोकलाम के विवाद बाद सहरद पर दोनों देशों के बीच बातचीत से हल निकला था। जिनपिंग की यात्रा का कार्यक्रम बुधवार को दिल्ली व बीजिंग में लगभग एकसाथ और यात्रा शुरू होने के मात्र 50 घंटे पहले घोषित किया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिनपिंग की यह यात्रा दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय विकास की साझेदारी पर गहन मंत्रणा का अवसर बनेगी।

तैयारियों अंतिम दौर में, 2000 स्टूडेंट्स करेंगे विशेष प्रकार से वेलकम

जिनपिंग की यात्रा की तैयारिंयां अंतिम दौर में हैं और एयरपोर्ट से लेकर सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष साज सज्जा की गई है।

इसके अलावा चेन्नई में 2000 से ज्यादा स्टूडेंट्स जिनपिंग का स्पेशल मास्क पहनकर उनका स्वागत करेंगे।

कश्मीर व लद्दाख पर भारत का पक्ष रखेंगे पीएम मोदी

जिनपिंग की यात्रा से पहले खबर है कि इस मुलाकात के दौरान जरूरत हुई तो प्रधानमंत्री मोदी, जिनपिग को भारत के कश्मीर और लद्दाख को लेकर लिए गए फैसले के बारे में जानकारी दे सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि यदि जिनपिंग ने कश्मीर व लद्दाख के मसले को समझना चाहा तो पीएम मोदी उन्हें भारत का पक्ष साफतौर पर बताएंगे। भारत का स्पष्ट मानना है कि संविधान देश का संप्रभु मसला है और कोई भी देश हो वह संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने पर चीन को आपत्ति है।

ऐतिहासिक शहर है मामल्लापुरम, चीन से सदियों पुराना है लिंक

शिखर वार्ता के लिए जिनपिंग तमिलनाडु के मामल्लापुरम पहुंचेंगे। इस ऐतिहासिक शहर का नाम अब महाबलीपुरम हो चुका है। इसी शहर में सदियों पहले चीनी यात्री फाह्यान आए थे। इसलिए शिखर वार्ता के लिए इसे चुना गया है। तमिलनाडु का महाबलीपुरम ऐतिहासिक शहर है। यहां पल्लव युग के 1000 साल पुराने मंदिर व स्मारक हैं। यूनेस्को ने इन्हें विश्व धरोहर घोषित कर रखा है। यहां शिल्पकारों ने अपनी अद्भुत कला को आकार दिया है। यह जगह तमिलनाडु और चीन के फुजियान शहर के बीच सदियों पुराने व्यापार और सांस्कृतिक लिंक के लिए भी जाना जाता है। फुजियान संभवतः चीन का अकला ऐसा शहर है जो दक्षिण भारत और चीन के तटिय शहर के बीच 1400 साल पुराने व्यापारिक संबंधों के सबूत लिए जिंदा है।