लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने एक कानून बनाया है, जिसके तहत प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य ने कहा है कि यह अध्यादेश एक बड़ा फैसला है और शिक्षा के मंदिरों में सिर्फ शिक्षा दी जानी चाहिए। कानून का उल्लंघन करने वाले विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।

अध्यादेश को प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दी है और इस अध्यादेश के तहत प्रदेश की सभी 27 निजी विश्वविद्यालयों को लाया गया है। अध्यादेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों को अपने छात्रों में देशभक्ति की भावना पैदा करनी चाहिए। साथ ही धर्मनिरपेक्ष, प्रजातात्रिंक मूल्य, विश्व बंधुत्व और सहिष्णुता को बढ़ावा देना चाहिए। उपमुख्यमंत्री मौर्य ने कहा कि यह सही है कि प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है और प्रदेश क्या देश के किसी भी शिक्षा संस्थान में देशविरोधी गतिविधियां को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश ( UPPO) 2019 राज्य विधानसभा में जुलाई में पेश किया जाना है। 27 निजी विश्वविद्यालयों के पास इस कानून को अमल में लाने के लिए एक साल की मोहलत होगी, जबकि नए विश्वविद्यालयों को इस बात का वचन देना होगा कि उनके यहां पर इस तरह की गतिविधि नहीं होगी।

कुछ लोग योगी सरकार के इस प्रयास को निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों पर नियंत्रण के रूप में देख रहे है, विशेषकर वे शिक्षा संस्थान जहां पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय या तो संस्थानों के कानून से बंधे है, जिनसे वह संबंधित है या फिर निजी विश्वविद्यालयों के अपने कानून-कायदे हैं। निजी विश्वविद्यालय कानून यह सुनिश्चित करेगा कि निजी विश्वविद्यालय राज्य में कैसे कार्य करेंगे।