गौरव शर्मा, बुलंदशहर। एक ओर कठोर मातृत्व है तो दूसरी ओर कोमल हृदय में करुणा का अथाह सागर। एक तरफ, कोख से जन्म देकर दो नवजात बेटियों को छोड़कर जाने वाली क्रूर मां है तो दूसरी ओर उन्हीं बेटियों को गले और सीने से लगाने वाली, कोमल नाम की महिला डॉक्टर। दरअसल, दो नवजात बेटियों को जीवन भर लालन-पालन करने का संकल्प लेने वाली डॉक्टर कोमल ने समाज को आइना दिखाया है। साबित किया है कि बेटियां बड़े काम की होती हैं। कोमल भले ही अविवाहित हैं, लेकिन उनमें ममता की निर्झरणी बह रही है। बिन ब्याह के मातृत्व की यह मिसाल शायद ही कहीं मिले।

नगर के चांदपुर फाटक की मूल निवासी डॉ. कोमल यादव बचपन से ही दयालु प्रवृत्ति की रही हैं। मां गंगा यादव ने बताया कि उनकी बेटी कोमल ने वर्ष 2010 में एमबीबीएस किया। इसके बाद भारती विद्यापीठ पूना से पोस्ट ग्र्रेजुएशन किया। फिलहाल, वह मेजर एचडी सिह मेडिकल कॉलेज, फर्रुखाबाद में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में तैनात थीं। कुछ रोज पहले यहां अस्पताल में ही एक महिला ने दो बेटियां को जन्म दिया। बाद में वह दोनों बेटियों को अस्पताल में ही छोड़ गई। कोमल को यह बड़ा नागवार लगा। उनका हृदय करुणा से भर गया।

ऐसे में कोमल ने दोनों बेटियों को खुद अपना लिया। हालांकि पिता व मां ऐसा करने से मना करते रहे। इसलिए भी कि कोमल की शादी अभी नहीं हुई है। पिता सीताराम यादव ने कहा भी कि अविवाहित होते हुए दो बेटियों को गोद लेना हंसी-खेल नहीं है। लेकिन कोमल ने उनकी नहीं सुनी। ममता की पुकार पर कोमल ने बेटियों के लालन-पालन का संकल्प दोहराया।

यहां तक कह दिया कि शादी भी उसी से करेंगी जो इन दो बधिायों को खुशी से स्वीकार करेगा। मां गंगा यादव ने बताया कि मेजर एचडी सिह मेडिकल कॉलेज से कोमल ने फिलहाल त्यागपत्र दे दिया है। दोनों बेटियों को लेकर वह हिमाचल के हमीरपुर चली गई हैं। वहीं पर कोमल ने नए हॉस्पिटल में नई ज्वाइनिग की है।

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