कानपुर। उत्तर प्रदेश में कानपुर के बिठूर में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उसके साथियों ने गुरुवार देर रात को दबिश देने गई पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। घटना में सीओ और एसओ सहित 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए हैं, जबकि 7 पुलिसकर्मी घायल बताए जा रहे हैं। उन्हें इलाज के लिए रीजेंसी में भेजा गया है। कानपुर जोन के अपर पुलिस महानिदेशक जय नारायन सिंह ने घटना की पुष्टि की। वारदात शिवली थाना क्षेत्र के विकरू गांव की है, जहां देर रात पुलिस दबिश देने गई थी।

गोलीबारी में घायल एक पुलिसकर्मी ने बताया कि दबिश के दौरान अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्हें पहले से ही इसके बारे में भनक लग गई थी। पुलिस जब तक कुछ समझ पाती या मोर्चा संभालती सात लोगों के गोली लगने से बचाव की स्थिति में आ गई और मौका पाकर बदमाश मौके से भाग निकले। बताया जा रहा है कि बदमाश पुलिस के हथियार भी लूट ले गए हैं। पुलिस ने बताया है कि मुठभेड़ में विकास दुबे के तीन साथियों को मार गिराया है।

बताया जा रहा है कि विकास दुबे के घर से पास में जेसीबी खड़ी कर दी गई थी, ताकि पुलिस जीप से उसके घर तक नहीं पहुंच सके। जैसे ही पुलिसकर्मी जीप से उतरकर पैदल घर की तरफ चले, छत से गोलीबारी शुरू हो गई। घटनास्थल से एके-47 के खोखे बरामद हुए हैं। एसएसपी, सहित आलाअधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और फॉरेंसिक की टीम सबूत जुटा रही है।

योगी आदित्यनाथ ने दी कड़ी कार्रवाई के आदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में अपराधियों द्वारा गोलीबारी के बाद जान गंवाने वाले आठ पुलिस कर्मियों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने डीजीपी एचसी अवस्थी को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है और घटना की रिपोर्ट भी मांगी है। घटना पर सीएम लगातार डीजीपी अवस्थी और अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह के संपर्क में हैं।`

ऐसे शुरू हुआ अपराध का सिलसिला

कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का नाम साल 2000 में कानपुर के शिवली थाना क्षेत्र में स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में आया था। कानपुर के शिवली थाना क्षेत्र में ही साल 2000 में रामबाबू यादव की हत्या के मामले में विकास दुबे पर जेल के भीतर रह कर साजिश रचने का आरोप है। मगर, साल 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या करने के बाद वह नामी बदमाश बन गया।

इसके अलावा साल 2004 में हुई केबल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या के मामले में भी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे आरोपी है। उसने कई युवाओं की फौज तैयार कर रखी है। इसी के साथ वह कानपुर नगर से लेकर कानपुर देहात तक लूट, डकैती, मर्डर जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देता रहा है।

मायावती सरकार में बनाई अवैध संपत्ति

साल 2018 में विकास दुबे ने अपने चचेरे भाई अनुराग पर जानलेवा हमला किया था। उसने माती जेल में बैठकर पूरी साजिश रची थी, जिसके बाद अनुराग की पत्नी ने विकास सहित चार लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज करवाया था। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की राजनीतिक दलों में पकड़ है। साल 2002 में जब मायावती की सरकार के दौरान विकास दुबे ने जमीनों पर अवैध कब्जे के साथ और गैर कानूनी तरीकों से संपत्ति बनाई। इसके ऊपर 60 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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