यह बहुत दिलचस्‍प और प्रेरक कहानी है। इससे यह सबक और संदेश भी मिलता है कि जीवन में अच्‍छे अवसर कभी भी आ सकते हैं, भले ही आप कहीं पर भी हों। एक कैदी को 8 लाख रुपए सालाना का शानदार पैकेज मिला है। यह शख्‍स जेल में उम्र कैद की सज़ा काट रहा है। उस पर केस चला था और सजा हुई यह अलग बात है लेकिन उसने यह साबित कर दिया कि उसकी योग्‍यता और प्रतिभा पर बंदिश नहीं लगाई जा सकती। कोरोना संकट में उसे एक नामी कंपनी ने विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए आठ लाख रुपये सालाना का पैकेज दिया है। इस काम के लिए उसे सालाना आठ लाख रुपये का पैकेज भी मिल रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की के इस स्कालर कैदी के हुनर को जेल अधिकारियों ने पहचाना और उसे हौसला देने के साथ रचनात्मक कार्यों से जुड़ने की प्रेरणा दी। ऐसे में अब वह जेल से ही सुबह 10 बजे अपने काम पर चला जाता है और शाम चार बजे जेल में वापस पहुंचता है। दिन के वक्त वह 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थिंयों को आनलाइन विज्ञान विषय की पढ़ाई करवा रहा है। कंपनी को उसका हुनर बेहद पसंद आया है। इससे पहले वह जेल विभाग की भर्ती परीक्षा के लिए साफ्टवेयर भी तैयार कर चुका है। वहीं, जेल विभाग भी उससे कई बार तकनीकी सहायता ले चुका है। कैदी होने के बावजूद अब वह स्थिर मन से बच्चों को पढ़ाने की नौकरी कर रहा है। यह सजायाफ्ता कैदी अपराध को भूल शिक्षा में मिसाल कायम कर रहा है।

गर्लफ्रेंड की हत्या करने पर हुई थी उम्र कैद

शिमला में 2010 में इस युवक पर आइआइटी दिल्ली में पढ़ रही 22 वर्षीय प्रेमिका की हत्या का आरोप लगा। दोषी पाए जाने पर उत्तर प्रदेश के गौंडा जिला निवासी युवक अब यहां उम्र कैद की सजा भुगत रहा है। जेल विभाग जेलों में हर हाथ को काम देने का प्रयास कर रहा है। सजा पूरी करने के बाद ये लोग इसके सहारे परिवार की रोजी रोटी भी चला रहे हैं।

कई कैदी कर रहे बैचलर डिग्री प्रोग्राम और अन्य कोर्स

सेंट्रल जेल नाहन में कई कैदी प्रेरक मिसाल कायम कर रहे हैं। कई कैदी इग्नू से बैचलर डिग्री प्रोग्राम और अन्य कोर्स कर रहे हैं। कई मात्र पांचवीं कक्षा पास थे, लेकिन अब 12वीं कक्षा पास कर चुके हैं। कैदी राजेश कुमार अतुल कुमार, संदीप, सूरजभान, प्रदीप नागर, गुरप्रीत सिंह लक्की, राजेश कुमार व प्रताप सिंह बीए प्रथम वर्ष और सुमित शर्मा, सतपाल अनिल गोपाल, योगानंद और प्रवेश कुमार बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। जेल अधीक्षक गोपाल लोधटा के मुताबिक कैदियों को इग्नू की शिक्षा का काफी लाभ मिल रहा है।

कैदियों के हुनर को निखारने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। जहां तक आइआइटी रुड़की से पढ़े कैदी का सवाल है। वह काफी हुनरमंद है। उसने किसी कंपनी के साथ अनुबंध साइन किया है। प्रदेश के अनूठे प्रयासों को अन्य राज्यों ने भी सराहा है।

-सोमेश गोयल, महानिदेशक (डीजी) जेल

Posted By: Navodit Saktawat

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस