सियाचिन। Avalanche in Siachen : सियाचिन से दुखद खबर आई है। यहां हिमस्‍खलन के चलते सेना के 4 जवान शहीद हो गए हैं। इनके अलावा दो कुलियों की भी बर्फ में दबने से मौत हो गई है। सियाचिन ग्लेशियर में दोपहर के समय हिमस्खलन की चपेट में आने से आठ सैनिक बर्फ के नीचे दब गए थे। सेना के अधिकारियों ने कहा कि आठों सैनिक एक गश्त पर थे। बचाव अभियान के तहत आसपास के इलाकों से रेस्‍क्‍यू टीमें पहुंची थीं। आठों जवानों को जब बाहर निकाला तो देखा उनकी हालत गंभीर थी। उन्‍हें मलबे से निकालने के बाद हेलीकॉप्‍टरों से निकट के आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया। सेना के मुताबिक शहीद हुए जवान हाइपोथर्मिया से ग्रस्‍त हो गए थे।

सेना के सूत्रों के मुताबिक हिमस्खलन की चपेट में आए सेना के जवान एक गश्त करने वाली पार्टी का हिस्सा थे, जिसमें आठ व्यक्ति शामिल थे। जिस समय घटना हुई थी, तब वे उत्तरी ग्लेशियर में थे। हिमस्खलन से सियाचिन ग्लेशियर में सेना की स्थिति प्रभावित हो गई है। यह हिमस्खलन उत्तरी ग्लेशियर में हुआ जहां ऊंचाई लगभग 18,000 फीट और उससे अधिक है। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 3.30 बजे उत्तरी ग्लेशियर क्षेत्र में हुई। लद्दाख में हिमालय के उत्तरी किनारे पर स्थित हिमनद 22,000 फीट की ऊँचाई तक है, इसलिए यहां हिमस्खलन का खतरा है। गौरतलब है कि फरवरी 2016 में, ग्लेशियर में हुए बड़े हिमस्खलन में 10 सैनिक मारे गए थे। लांस नायक हनमनथप्पा कोप्पड़ 25 दिनों तक बर्फ के नीचे दबे रहे। वे छह दिनों तक जीवित रहे, बाद में दिल्ली के एक सेना अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

कोप्पड़ उन 10 सैनिकों में से थे, जो 20 फरवरी को 20,500 फीट की ऊंचाई पर सोनम पोस्ट की रखवाली करते हुए हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे।

Posted By: Navodit Saktawat