अयोध्या। रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अब रामरसोई का उम्दा खाना मिलेगा। रामरसोई योजना के सूत्रधार पूर्व आईपीएस अधिकारी व पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर सेवा ट्रस्ट और अमावा राममंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल हैं। अमावा राममंदिर रामजन्मभूमि से कुछ ही दूरी पर रामलला के दर्शन मार्ग पर ही स्थित है। रामरसोई इसी परिसर में संचालित की जाएगी। रामरसोई की शुरुआत 23 नवंबर से एक दिसंबर को पड़ रहे सीता-राम विवाहोत्सव के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि प्रारंभ में पांच सौ से एक हजार श्रद्धालु रामरसोई में भोजन करेंगे पर आने वाले कुछ महीनो में ही यह संख्या पांच हजार तक पहुंच सकती है। इसी हिसाब से आचार्य कुणाल रामरसोई की तैयारियों में लगे हुए हैं। बिहार से आधा दर्जन जानकार रसोइए अमावा मंदिर पहुंच भी गए हैं। इनके सहयोग के लिए कुछ स्थानीय श्रमिकों को लगाया जाएगा। कुणाल किशोर ने दो दशक पहले सूर्यवंशीय नरेशों के त्रेतायुगीन देवालय माने जाने वाले अमावा मंदिर के उद्धार की पहल की थी। इसी मंदिर के मुख्य द्वार की दूसरी मंजिल पर उन्होंने इसी महीने सुप्रीम फैसला आने के पहले भगवान राम के दर्शनीय बाल विग्रह की स्थापना कराई है। कुणाल किशोर सुप्रीम कोर्ट में राममंदिर के पक्षकार भी रहे हैं। इस विवाद के अंत में उनकी कृति 'अयोध्या रीविजिटेड' को अहम माना जाता है।

रामरसोई में यूं तो चावल, दाल, रोटी, सब्जी के रूप में रामलला के दर्शनार्थियों को स्वादिष्ट और परिपूर्ण भोजन मिलेगा, लेकिन चावल गोविद भोग नाम की विशेष प्रजाति का होगा। बिहार के कैमूर जिले में मां भवानी के सुप्रसिद्ध मंदिर मुंडेश्वरी की पहाड़ी से आने वाले पानी से उपजने वाले इस चावल के स्वाद-सुगंध की साख पूरि दुनिया में है। जल्द ही गोविद भोग की पहली खेप अयोध्या पहुंचेगी।

Posted By: Yogendra Sharma