Balakot Air Strike को आज एक साल पूरा हो गया है। IAF भारतीय वायुसेना के इस शौर्य को सारा देश अभी भूला नहीं है। यह पराक्रम की ऐसी गाथा है जो बरसों तक याद रखी जाएगी। 14 फरवरी 2019 को कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए बड़े आत्‍मघाती हमले में 45 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद देश में लगातार गुस्‍सा उबलता रहा। भारतीय सेना ने महज 12 दिनों के भीतर ही बालाकोट में पनप रहे जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी शिविर तबाह कर दिए और अपने सैनिकों की शहादत का प्रतिशोध लिया था। आज एक साल बाद यह आलम है कि आतंकी शिविरों और बंकरों में घबराने लगे हैं। आतंकी वारदातों में कमी आई है। यह एयर स्‍ट्राइक वैसे तो बालाकोट में हुई लेकिन इसका असर दूरगामी रहा है। पाकिस्‍तान के साथ ही पूरी दुनिया में यह संदेश गया है कि भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए सख्‍त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

आतंकी संगठनों को नहीं मिल रहे अब कमांडर

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद की जड़ें उखाड़ने वाले बालाकोट ऑपरेशन के बाद यह हाल हो गया कि आतंकी संगठनों को चलाने के लिए कमांडर ही नहीं मिल रहे हैं। श्रीनगर के चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लो कहते हैं कि पाकिस्‍तान जिन कमांडरों को कश्‍मीर भेजने के लिए तैयार करता है, वो यहां आने को राजी नहीं होते। उन्‍हें यह आशंका है कि वे कश्‍मीर में मार दिए जाएंगे।

पाक नहीं चाहता, दोबारा बालाकोट जैसा हमला

कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ कहते हैं कि बालाकोट हमले के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्‍तान का आतंकी परस्‍त चेहरा उजागर हो गया है। जबसे भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंक के अड्डे का सफाया किया, उसके बाद से पाकिस्‍तान बैकफुट पर है। पाकिस्‍तान ने उसके बाद से कोई हमला नहीं किया, यह बात भी गौर करने योग्‍य है। विंग कमांडर अभिनंदन की घर वापसी ने बालाकोट एयर स्‍ट्राइक की सफलता पर मुहर लगा दी थी।

इमरान खान का हालिया बयान करता है यह तस्‍दीक

पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बालाकोट के बाद इसके जैसे कई ऑपरेशंस से पाकिस्‍तान की बचाने की कोशिश कर चुके हैं। इतना ही नहीं, उनके कई बयान इस बात की तस्‍दीक करते हैं कि वे बैकफुट पर हैं। हाल ही में इमरान ने एक विदेशी चैनल से साक्षात्‍कार में यहां तक कह डाला कि जब तक पीएम मोदी हैं, पाकिस्‍तान कश्‍मीर में कुछ नहीं कर सकता।

Posted By: Navodit Saktawat