कोरोना महामारी के कारण आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार आगामी बजट में अब तक का सबसे बड़ा विनिवेश लक्ष्य रख सकती है। आगामी वित्त वर्ष के लिए विनिवेश का लक्ष्य तीन लाख करोड़ रुपये तक का हो सकता है। चालू वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सरकार ने 2.1 लाख करोड़ रुपए का विनिवेश लक्ष्य रखा था लेकिन अब तक लक्ष्य का छह फीसद ही हासिल किया जा सका है। गत जुलाई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियों (पीएसयू) में से सरकारी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की थी और यह काम भी आगामी वित्त वर्ष में पूरा किए जाने की उम्मीद है। इनमें से सभी में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री को केंद्रीय कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक आगामी वित्त वर्ष में विनिवेश का लक्ष्य तीन लाख करोड़ तक रखने और उसे हासिल करने की भी सरकार की बाध्यता रहेगी, ताकि राजकोषीय घाटे को काबू में रखा जा सके।

एसबीआइ इकोरैप के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार का खर्च 35.7 लाख करोड़ तक रह सकता है जबकि सरकार की प्राप्ति 24.1 लाख करोड़ तक रह सकती है। यह अंतर 11.17 लाख करोड़ का है जो सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) का 5.2 फीसद तक हो सकता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में सरकारी खर्च और प्राप्ति में होने वाले बड़े अंतर को कम रखने के लिए विनिवेश एक कारगर उपाय हो सकता है।

Posted By: Navodit Saktawat

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