नई दिल्‍ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अर्थव्‍यवस्‍था में जान डालने के लिए कई अहम फैसले किए। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इन फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन को अनुमति दे दी है। इससे किसान एग्रीकल्चर प्रोड्युसर मार्केट कमेटी के बंधन से अब मुक्त हो गया है। उन्‍होंने बताया कि कैबिनेट मीटिंग में किसानों के हक में लिए तीन बड़े फैसले किए गए हैं। कैबिनेट ने ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट करने को भी मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट के आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन करके किसान को अब कहीं भी और ज्यादा कीमत देने वाले को अपना उत्‍पाद बेचने के लिए अनुमति दे दी है। उन्‍होंने बताया कि आवश्यक वस्तु कानून की तलवार ने निवेश में भी बाधा पैदा कर रखी थी। वर्तमान में अनाज, तेल, तिलहन, दाल, प्याज, आलू जैसे कृषि उत्‍पाद आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं। अब किसान इनका योजना के मुताबिक भंडारण कर सकता है और इनकी बिक्री कर सकता है। इस निर्णय से किसानों को फायदा होगा।

जावड़ेकर ने बताया कि किसान 50 सालों से इन बदलावों की मांग कर रहे थे। उन्‍होंने यह भी बताया कि सरकार वन नेशन, वन मार्केट की दिशा में आगे बढ़ेगी और इसके लिए भी कानून बनाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि ज्यादा कीमतों की गारंटी के मसले पर भी एक फैसला हुआ है। यदि कोई निर्यातक, कोई प्रोसेसर या कोई उत्पादक है तो उसको कृषि उपज को आपसी समझौते के तहत बेचने की सुविधा प्रदान की गई है। इस निर्णय से एक आपूर्ति चेन खड़ी होगी। भारत में पहली बार ऐसा फैसला किया गया है।

वहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इसेंसियल कॉमोडिटी एक्‍ट में संशोधन कृषि उत्पाद के क्षेत्र में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक्‍ट में बदलाव होने से किसान कहीं भी सीधे अपनी फसलें बेच सकेंगे। अब देश में किसानों के लिए एक देश एक बाजार की प्रणाली होगी।

संशोधन के अनुसार, कारोबारी और किसान के बीच कोई विवाद की स्थिति बनेगी तो इसे कोर्ट से बाहर रखा जाएगा। इसकी पहली शिकायत एसडीएम के पास जाएगी जिसमें 30 दिन में फैसला देना होगा। एसडीएम के फैसले से असंतुष्ट होने पर कलेक्टर के पास अपील की जाएगी। इसके अलावा सरकार ने फार्माकोपिया कमीशन की स्थापना का भी फैसला लिया है। आयुष मंत्रालय की गाजियाबाद की दो प्रयोगशालाओं का भी इसमें मर्जर हो रहा है। यह फैसला दूसरी ड्रग्स के स्टैंडर्डाइजेशन को सुनिश्चित करेगा।

केंद्रीय कैबिनेट की एक सप्ताह में यह दूसरी बैठक थी। इससे पहले सोमवार को भी बैठक हुई थी जो मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे साल की यह पहली बैठक थी। इसमें MSME सेक्टर और किसानों को लेकर कुछ बड़े निर्णय लिए गए थे। अर्थव्‍यवस्‍था पर कोरोना का असर कम करने के लिए सरकार ने पिछले महीने 20 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा की थी। इसमें एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की योजना को अनुमति दी गई थी। साथ ही खरीफ की 14 फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने का फैसला भी हुआ था। अब दूसरी बैठक में एकबार फ‍िर किसानों को मजबूती देने के बारे में बड़ा निर्णय लिया गया है।

Posted By: Yogendra Sharma

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