मल्टीमीडिया डेस्क। मुल्क जब बेहद खराब दौर से गुजर रहा था। चारों और निराशा के बादल मंडरा रहे थे। फिरंगियों की गुलामी की वजह से देश अराजकता का माहौल व्याप्त था। देश के आर्थिक हालत खराब होते जा रहे थे और देश का अवाम उम्मीदों भरी नजरों से एक नायक की तलाश कर रहा थ। ऐसे एक शख्स विदेशी सरजमी से विलायती तालीम हासिल कर अपने मुल्क में वापस आता है और काफी ऐशोआराम में पलने के बावजूद वह सारी सुख-सुविधाओं को दरकिनार देश को आजाद करवाने के लिए आजादी की जंग में कूद जाता है। यह नौजवान था जवाहरलाल नेहरू, जो आगे चलकर देश का पहला प्रधानमंत्री बना।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू और माता का नाम स्वरूप रानी था। पंडित नेहरू मूलत: कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उनके पूर्वज बाद में दिल्ली, आगरा होते हुए इलाहाबाद में बस गए थे। इलाहाबाद शहर में उनका खानदान काफी रसूखदार और रईस था। उनकी शिक्षा दुनिया के बेहतरीन स्कूल, कॉलेजों में हुई थी। उन्होंने अपनी जिंदगी के सात साल इंग्लैंड में बिताए और स्कूली शिक्षा हैरो स्कूल से लेने के बाद ट्रिनिट्री कॉलेज कैम्ब्रिज में दाखिल हुए।

इंग्लैंड से वो 1912 में भारत लौटे और 1916 में कमला नेहरू के साथ परिणय सूत्र में बंध गए। 1917 में पंडित नेहरू होमरुल लीग से जुड़ गए, लेकिन राजनीति में उनकी विधिवत शुरूआत 1919 में उस वक्त हुई जब वो महात्मा गांधी के संपर्क में आए। महात्मा गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने अपने महंगे परिधानों का त्याग कर दिया और सादगीभरा जीवन जीना शुरु कर दिया। अब वो सिर्फ खादी के कपड़े पहनते थे। 1920-1922 में उन्होंने असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उनको गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ महीनों बाद रिहा कर दिया गया। 1924 में पंडित नेहरू इलाहाबाद नगर-निगम के अध्यक्ष चुने गए और 1926 में ब्रिटिश अधिकारियों के असहयोग के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के दौरान वो पार्टी के अध्यक्ष चुने गए। कांग्रेस के इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य का संकल्प लिया गया। 1936 और 37 में वो एक बार फिर कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। 1947 में देश को फिरंगी राज से मुक्ति मिलने के बाद वो आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनें। पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन 27 मई 1954 को राजधानी दिल्ली में हुआ।

पंडित जवाहरलाल नेहरू एक बेहतरीन लेखक भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में भारत की खोज, विश्व इतिहास की झलक, पिता के पत्र पुत्री के नाम, मेरी कहानी, राजनीति से दूर, इतिहास के महापुरुष, राष्ट्रपिता जैसी उम्दा किताबें लिखी।

Posted By: Yogendra Sharma