नई दिल्ली। एक तरफ जहां भारत समेत दुनिया के अन्य देश कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ चीन है कि सीमा पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इस वजह से इन दिनों लद्दाख के पूर्व में भारत व चीन की सेनाओं के बीच हालात कुछ वैसे ही हो गए हैं जैसे 2017 में डोकलाम में बने थे। भारत और चीन की सेनाएं एक दूसरे से कुछ 100 मीटर की दूरी पर ही तैनात हैं और चीनी सेना अपनी गतिविधियां बढ़ा भी रही है। चीन के इस कदम को देखते हुए भारत ने भी उसे जैसे को तैसा की तर्ज पर जवाब देने की तैयारी कर ली है।

इसी के तहत भारत भी सीमा पर अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। सेना का उत्तरी कमान कुछ घंटे की सूचना पर तनावग्रस्त इलाके में और ज्यादा सैनिकों को भेजने की तैयारी पूरी कर चुका है। इसके अलावा चीन से सटे अपने हिस्से में ढांचागत विकास का काम भी तेज कर चुका है। सैन्य सूत्रों ने स्वीकार किया है कि चीन की सेना की तरफ से टेंट लगाने के जो फोटो सोशल मीडिया में आए हैं वे भारतीय जमीन पर लगाए गए है।

पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अभी तक जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच अलिखित समझौता था उसका साफ साफ चीन उल्लंघन कर रहा है। पूर्व में भी गर्मियों में चीन की सेना ने इस क्षेत्र में घुसपैठ की है लेकिन यह पहला मौका है जब उसकी तरफ से एक साथ कई बड़े टेंट लगाये गए हैं। भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा गलवां नाला एरिया में भी चीनी सैनिकों ने डेरा डाला हुआ है। नए टेंट अभी तक लगाये जा रहे हैं। चीन की तरफ से सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है। भारत की तरफ से इन गतिविधियों के बारे में जो स्थापित चैनल हैं उसके जरिए शिकायत दर्ज कराई गई है लेकिन अभी तक कोई असर होता नहीं दिख रहा है।

चीन की इन हरकतों को देखते हुए भारतीय पोस्ट केएम 120 के पास भारतीय सेना ने अभी तमाम साजो समान वहां पहुंचा दिए हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश से जुड़े इलाकों में भी भारतीय सेना ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है।

कूटनीतिक क्षेत्र के सूत्रों का कहना है कि चीन की पूरी तरह से रणनीति डोकलाम जैसी ही है जब दोनो देशों की सेनाएं तकरीबन ढाई महीने तक कुछ सौ मीटर पर एक दूसरे के सामने डटी रही थीं। तब भी चीन ने एक विवादास्पद इलाके में सड़क निर्माण के साथ ही अस्थाई टेंट का निर्माण कर लिया था। बाद में जब दोनो देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत हुई तब जा कर चीन ने वहां से अपने सैनिक वापस बुलाये थे।

लद्दाख से लेकर सिक्किम तक जो अभी चीन की सेना कर रही है वह डोकलाम का ही अगला स्टेप लग रहा है। चीन इस बात से परेशान है कि पिछले 5 वर्षों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के अधिकांश हिस्से के पास भारत ने सड़कों का एक मजबूत नेटवर्क बना लिया है। यही नहीं लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक में भारत ने अपनी वायु सेना के लिए भी बेहतरीन नेटवर्क तैयार कर लिया है।

पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने दोनो देशों के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा है कि सीमा विवाद का जल्द से जल्द एक व्यवहारिक, साफ व दोनो पक्षों की तरफ से स्वीकार्य हल निकालना ही एकमात्र स्थाई हल है। वर्ष 1993 से दोनो देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने का जो तरीका अपनाया था लगता है वह अब काम नहीं कर रहा। उनका मानना है कि जिस तरह से राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने हर मोर्चे पर ज्यादा सख्ती दिखाने की रणनीति अपनाई है, भारत के साथ तनाव बनाए रखना भी उसकी का हिस्सा हो सकता है लेकिन इस तरह की छोटी छोटी घटनाएं बड़े संघर्ष में बदल सकती हैं।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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