धर्मेंद्र मिश्रा, लखनऊ Coronavirus Update । कोरोना संक्रमण से जो मरीज स्वस्थ हो गए हैं, वे भी बेपरवाह न बनें, क्योंकि यह वायरस हमारे फेफड़ों में फाइब्रोसिस की वजह बन रहा है। इसके चलते न केवल फेफड़ों में सिकुड़न व सूजन हो सकती है, बल्कि निमोनिया, लगातार सांस फूलना, टीबी व अन्य तरह के संक्रमण का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि डॉक्टर कोरोना को मात दे चुके मरीजों को भी फेफड़े का एक्सरे कराने की सलाह दे रहे हैं।

तेजी से पांव पसारते कोरोना के बीच ठीक हो चुके मरीजों को लेकर भी चिंतित करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। कोरोना को बेशक हम तेजी से मात दे रहे हैं, मगर तमाम मरीजों में वह अपना असर हमेशा के लिए छोड़कर जा रहा है। लोहिया संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह बताते हैं कि कोरोना पीड़ितों के फेफड़े का एक्सरे करने पर कुछ मरीजों में फाइब्रोसिस की मौजूदगी देखी जा रही है। इसमें मरीज के फेफड़े पर एक विशेष स्थान पर काला धब्बा दिखता है। बाद में धीरे-धीरे उस स्थान पर सिकुड़न या सूजन आने लगती है।

इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। ऑक्सीजन का स्तर भी गिरने लगता है। कई बार फाइब्रोसिस की वजह से मरीज को सीवियर निमोनिया भी हो जाता है। अगर कोरोना मरीजों को फाइब्रोसिस और निमोनिया दोनों हो गया तो उन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। फाइब्रोसिस ऐसी समस्या है, जो एक बार हो जाने पर कभी निमोनिया के तौर पर तो कभी अन्य तरह के संक्रमण के तौर पर जिंदगीभर बना रहता है।

30 फीसद मरीजों में ज्यादा दिक्कत

डॉ. विक्रम सिंह के अनुसार देश-विदेश के अध्ययनों में पाया गया है कि करीब 30 फीसद कोरोना मरीजों के फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो रहा है। जो मरीज एसिप्टोमेटिक हैं, यानी जिनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखते, उनमें से भी कुछ फीसद फाइब्रोसिस का शिकार हो रहे हैं।

फेफड़ों में जगह बनाता है बैक्टीरिया

चिकित्सक बताते हैं कि अगर किसी कोरोना पॉजिटिव मरीज की सांस तेज चलने पर फूलती है तो यह फाइब्रोसिस होने का प्रमुख लक्षण हो सकता है। फेफड़े के जिस एरिया में संक्रमण होता है, वहां बैक्टीरिया का जमाव हो जाता है। इससे फेफड़े में सिकुड़न आ जाती है। यह समस्या जीवनभर रह सकती है।

कोरोना से बचने को ये रखें सावधानी

- मास्क व शारीरिक दूरी का पालन करें।

-साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

-गर्म पानी पीएं। बीच-बीच में भाप भी लेते रहें।

-फ्रीज में रखी वस्तुएं खाने-पीने से परहेज करें।

-विटामिन सी व डी की शरीर में कमी न होने दें।

-प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन करें।

-शरीर की इम्यूनिटी कम ना होने दें।

Posted By: Sandeep Chourey

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