कानपुर। कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा पांच लाख रुपए का इनामी गैंगस्टर विकास दुबे मार गिराया गया है। कानपुर के पनकी में सुबह करीब 6.30 बजे उसने पुलिस की पिस्टल छीनकर पुलिस पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में वह घायल हो गया था और उसे हैलट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पंडित जी के नाम से इलाके में कुख्यात विकास दुबे का आपराधिक सफर की शुरुआत साल 1990 में हुई थी, जब हत्या के एक मामले में उसका नाम आया था। अपने 30 साल के आपराधिक जीवन में उसके खिलाफ 60 से ज्यादा मामले दर्ज थे।

इस तरह बन गया पंडित जी...

विकास दुबे के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, जमीन पर कब्जे और रासुका जैसे मामले दर्ज हुए थे। उसके ऊपर साल 1994 में हत्या युक्त डकैती का मामला बिल्हौर में दर्ज किया गया था। अब तक उसकी दहशत इलाके में फैलने लगी थी। साल 1999 में फिल्म अर्जुन पंडित आई और उसमें सनी देवल के किरदार से वह इतना प्रभावित हुआ कि अपने नाम के आगे विकास पंडित लिखने लगा। इसके बाद इलाके में वह पंडित जी के नाम से कुख्यात हो गया।

जमीन पर कब्जे के एक मामले में साल 2000 में विकास दुबे ने शिवली थाना क्षेत्र के ताराचंद्र इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में वह नामजद किया गया था। इसके बाद साल 2001 में शिवली थाने में घुसकर उसने तत्कालीन राज्य सरकार का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता और श्रम संविदा बोर्ड के चेयरमैन संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। इस मामले में थाना प्रमुख सहित सभी पुलिसकर्मी गवाह बने थे। मगर, विकास के डर के सामने सब झुक गए और किसी ने भी कोर्ट में गवाही नहीं दी।

संतोष शुक्ला हत्याकांड के बाद विकास का दबदबा इतना बढ़ गया कि फिर किसी ने भी उसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं की। पुलिस और कानून का खौफ उसके दिल-दिमाग में बचा ही नहीं था। साल 2002 में शिवली नगर पंचायत के तत्कालीन चेयरमैन बम और गोलियों के हमला किया। इस मामले में उसे उम्र कैद की सजा मिली, लेकिन राजनीतिक आकाओं के संरक्षण की वजह से वह जल्द ही जेल से बाहर आ गया। साल 2004 में उसने केबल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या की।

दो जुलाई 2020 को पूरे पुलिस-प्रशासन को हिला दिया

इसके बाद से विकास दुबे तमाम आपराधिक वारदातों को अंजाम देता गया। पुलिसवालों को उसने खरीद लिया था। सिर्फ चौबेपुर थाना ही नहीं, आस-पास के कई थानों के पुलिसकर्मी उसके मुखबिर और सहायक बनकर काम करते थे। ऐसे में जब एक जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर कानपुर के मोहिनी नेवादा गांव निवासी राहुल तिवारी ने शिकायत की, तो उसने राहुल तिवारी को भी पीटा।

बाद में उसके साथ गए थानेदार को भी विकास ने तमाचा मारा, जिसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने पर सीओ देवेंद्र मिश्रा ने विकास दुबे के खिलाफ केस दर्ज कराया और दो तीन जुलाई 2020 की दरमियानी रात को पुलिस टीम का नेतृत्व करते हुए खुद विकास को गिरफ्तार करने पहुंचे।

मगर, पुलिस विभाग में मौजूद उसके मुखबिरों ने इसकी जानकारी पहले ही विकास दुबे को दे दी। लिहाजा, अपने शूटर्स के साथ पहले से तैयार विकास दुबे ने पुलिस टीम पर घात लगाकर ताबड़तोड़ हमला किया। इस वारदात में डीएसपी देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी मारे गए और सात अन्य घायल हो गए। विकास दुबे के इस कारनामे ने पूरे पुलिस-प्रशासन को हिलाकर रख दिया।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Ram Mandir Bhumi Pujan
Ram Mandir Bhumi Pujan