मल्टीमीडिया डेस्क। सात फेरों से रिश्तों के बंधन बंधते हैं और जिंदगी के नए सफर की शुरूआत होती है। सनातन संस्कृति की इस रस्म से दो दिल एक-दूसरे को हो जाते हैं और जिंदगी का नया दौर प्रारंभ हो जाता है, लेकिन बदलते दौर में रस्मों रिवाज में समाज सुधार का आठवां फेरा जोड़कर दंगल गर्ल बबीता फोगाट ने देश और समाज को नया और उम्दा संदेश दिया है।

दंगल गर्ल बबीता ने बेटियों को समर्पित किया आठवां फेरा

समाज सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने और समाज को नई दिशा देने में कुछ शख्सियतें हमेशा आगे रहती है और उनकी बातें आम लोगों पर खासा असर भी करती है। इसी रवायत को आगे बढ़ाते हुए दंगल गर्ल बबीता फोगाट ने अनूठी पहल की है। कुश्ती के अखाडे़ में अपने दांव-पेंच के जौहर दिखाने वाली बबीता फोगाट पिछले दिनों भारत केसरी पहलवान विवेक सुहाग के साथ शादी के गठबंधन में बंध गई। अखाड़े के दोनों पहलवानों की शादी रस्मो रिवाज के मुताबिक हुई, लेकिन दोनों ने एक कदम आगे बढ़कर समाज को अनूठा संदेश दिया और इसके लिए उन्होंने सात फेरों की रस्म को चुना। बबीता और विवेक ने आठवां फेरा लिया और यह आठवां फेरा उन्होंने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' को समर्पित किया।

सादगी भरे माहौल में हुई शादी संपन्न

देश-विदेश में अपनी पहलवानी की धाक जमाने वाले बबीता और सुहाग की शादी बेहद सादगी भरे अंदाज में हरियाणा के बलाली गांव में संपन्न हुई। पहलवानों की शादी थी इसलिए देश-विदेश के कई नामी-गिरामी पहलवानों ने भी शिरकत की। रविवार शाम सात बजे बरात बलाली गांव पहुंची जहां बगैर दहेज और साधारण सनातनी रीति-रिवाज से शादी संपन्न हुई। बरात में सिर्फ 21 बराती शामिल थे।

दंगल गर्ल बबीता फोगाट की पिछले पांच साल से दिल्ली के नजफगढ़ के विवेक सुहाग से दोस्ती थी। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और मोहब्बत का यह रिश्ता शादी में तब्दील हो गया। भारत केसरी का खिताब जीत चुके विवेक सुहाग झज्जर जिले के गांव मातनहेल के रहने वाले हैं और फिलहाल इंडियन रेलवे में कार्यरत हैं।

Posted By: Yogendra Sharma