मनीष शर्मा, मुजफ्फरनगर। तब्लीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज के साथ एक शख्स और इस वक्त सुर्खियों में बना हुआ है। यह शख्स हैं मौलाना साद।इनका पूरा नाम मौलाना मोहम्मद साद वल्द मौलाना हारुन मूल निवासी कांधला जिला शामली (पूर्व में मुजफ्फरनगर) उप्र है। कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में सबसे बड़े खलनायक के तौर पर उभरे तब्लीगी जमात के स्वयंभू अमीर बनने से लेकर अभी तक मौलाना साद का विवादों से पुराना नाता रहा है। दरअसल, जिस देवबंदी विचारधारा से प्रेरित होकर तब्लीगी जमात की नीव पड़ी मौलाना साद और उनके विचार इसके ही मुखालिफ खड़े हो गए। यही वजह रही कि दारुल उलूम देवबंद ने भी यह माना कि मौलाना साद की कुरान और हदीस से जुड़ीं तकरीरों में उनकी निजी राय शामिल रहती है। इतना ही नहीं तब्लीगी जमात का अमीर बनने की खातिर मौलाना साद ने सारे नियम-कायदे ताक में रख दिए। कांधला के मोहम्मद इस्माइल के घर जन्म लेने वाले मौलाना इलियास कांधलवी ने देवबंदी विचारधारा से प्रेरित होकर 1927 में तब्लीगी जमात की स्थापना इसलिए की थी कि दीन से भटक गए लोगों को कुरान और हदीस का हवाला देकर इस्लाम के सच्चे रास्ते पर ला सकें।

मौलाना इलियास कांधलवी के गुजरने के बाद उनके बेटे मौलाना यूसुफ तब्लीगी जमात के अमीर बने गए। मौलाना यूसुफ के बाद जमात की अमीरीयत उनके नूर-ए-चश्म मौलाना हारुन को मिलनी थी, लेकिन उनका असमय निधन हो गया। ऐसे में मौलाना इलियास कांधलवी के भांजे मौलाना इनाम उल हसन को तब्लीगी जमात की बागडोर मिल गई। बाद में उनके बेटे मौलाना जुबैरउल हसन इसके अमीर बन गए।

यहीं से तब्लीगी जमात का सिरमौर बनने की जंग शुरू हो गई। दरअसल, मौलाना इनाम उल हसन ने जमात के संचालन के लिए एक दस सदस्यों वाली शूरा कमेटी गठित कर दी । 1995 में मौलाना इनाम उल असन का निधन हो गया। सूरा कमेटी काम करती रही, लेकिन मौलाना साद को यह सब मंजूर नहीं था। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रायविड मरकज के मौलाना मोहम्मद अब्दुल वहाब की बनाई 13 सदस्यीय शूरा को दरकिनार कर संस्थापक मौलाना इलियास के पड़पोते मौलाना साद ने साल 2015 में खुद को तब्लीगी जमात का अमीर घोषित कर दिया।

तब्लीगी जमात का अमीर बनने को लेकर मौलाना साद हमेशा विवादों में रहे हैं। दारुल उलूम नदवातुल उलमा के जैद मजाहिरी ने इस पर तब्लीगी जमात का बहम इख्तिलाफ और इत्तेहाद ओ इत्तेफाक में तफ्सील से इस संबंध में लिखा है। इतना ही नहीं दारुल उलूम देवबंद ने 6 दिसंबर 2016 और दो मार्च 2018 को मौलाना साद के खिलाफ फतवे जारी किए। ऑनलाइन जारी फतवों में स्पष्ट कहा गया कि जांच में यह सिद्ध हो चुका है कि कुरान और हदीस का व्याख्यान मौलाना साद अपने नजरिए से करते हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी खत लिखकर मौलाना साद की तकरीरों और अमीरीयत पर सवाल खड़े किए गए।

मौलाना साद का कांधला में है आलीशान मकान

कांधला में मौलाना इलियास और मौलाना इफ्तखारुल हसन जैसे इस्लामिक विद्वानों की पैदाइश हुई। तब्लीगी जमात के संस्थापक और मौलाना साद के दादा मौलाना इलियास का पुश्तैनी घर आज भी एकदम सादगी वाला हैं, जबकि मौलाना साद ने कांधला के छोटी नहर के नजदीक आलीशान मकान बना रखा है। जानकारों का कहना हैं कि मौलाना साद कई बार अपने कांधला स्थित मकान पर आए हैं। फिलहाल मकान पर ताला लगा हुआ है। मौलाना साद के तीन बेटे हैं, जिनमें मौलाना यूसुफ, इलियास और एक अन्य हैं।

पश्चिम उत्तर प्रदेश में छिपने का शक

मौलाना साद तब्लीगी जमात की पुख्ता पैठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। गृह जनपद होने की वजह से शामली और मुजफ्फरनगर में तब्लीगी जमात की जड़ें बेहद गहरी हैं। दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात में इस जिले से गए 28 लोग इसका पुख्ता प्रमाण हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मौलाना साद की खोजबीन अंदरखाने यहां भी जारी है।

मंडल के जिलों से निजामुद्दीन मरकज में गए जमातियों की तलाश की जा रहा है। पुलिस पूरी तरह सतर्क है। मौलाना साद के संबंध में अभी दिल्ली पुलिस ने कोई संपर्क नहीं किया है। यदि दिल्ली पुलिस सूचित करती है तो उनकी पूरी सहायता की जाएगी। -उपेंद्र अग्रवाल, डीआइजी सहारनपुर रेंज

जमात का काम मौलाना इलियास कांधलवी ने भटके हुए लोगों को सही राह पर लाने के लिए प्रारंभ किया था। इस मिशन में लोग निस्वार्थ भाव से जुड़ते थे, लेकिन 2013 के बाद इस जज्बे में कमी आने से समाज का जिम्मेदार तबका व ज्यादातर उलमा इकराम मौजूदा जमात प्रबंधन से कटते चले गए हैं। -मौलाना खालिद जाहिद, इमाम व शायर।

तब्लीगी जमात की शुरूआत लोगों को इस्लाम और दीन की शिक्षा देने के लिए हुई थी। मौलाना इनाम उल हसन साहब के अमीर रहने तक सब सही चलता रहा।लेकिन बाद में अमीरीयत को लेकर तब्लीगी जमात में विवाद शुरू हो गए। देवबंदी विचारधारा से जमात की पैदाइश हुई और दारुल उलूम ने ही इनके खिलाफ बयान दिया था। -मुफ्ती जुल्फिकार, इस्लामिक विद्वान व पूर्व सदस्य, अल्संख्यक आयोग उत्तर प्रदेश।

Posted By: Yogendra Sharma

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