नई दिल्ली । रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकी फंडिंग से जुड़े ई-रेल टिकट के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया है। इस संबंध में गुलाम मुस्तफा नामक एक व्यक्ति को इसी महीने भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया गया है। वह कंफर्म टिकट बुक करने के एक खास सॉफ्टवेयर के जरिए आईआरसीटीसी के 563 पर्सनल आईडी इस्तेमाल करता था। उसके करीब 3,000 बैंक खाते भी हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 2,400 तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में 600 खाते हैं। इस शख्स से आईबी, स्पेशल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, एनआईए तथा अन्य एजेंसियां पिछले दस दिनों से पूछताछ कर रही है।

आरपीएफ महानिदेशक अरुण कुमार ने मंगलवार को यहां मामले की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि पिछले साल जब टिकट दलालों के खिलाफ ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म शुरू किया गया था, उसी समय से गुलाम मुस्तफा का नाम रडार पर था। वह झारखंड में मदरसे में पढ़ा हुआ है लेकिन खुद से सॉफ्टवेयर डेवलपिंग का काम सीखा है। मुस्तफा से पूछताछ के आधार पर 27 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। आरपीएफ ने उससे एएनएमएस नामक सॉफ्टवेयर वाले दो लैपटॉप बरामद किए हैं। इस सॉफ्टवेयर के जरिए वह फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कैप्चा तथा बैंक ओटीपी जैसे किए गए प्रावधानों को आसानी से पार कर जाता था।

क्रिप्टो करंसी के रूप में भेजता था पैसे

कुमार ने बताया कि इन टिकटों से जुटाए गए पैसे को वह क्रिप्टो करंसी में बदल कर शैडो नेटवर्क के जरिए विदेश भेजता था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकी फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग तथा अन्य गतिविधियों में होता था।

दुबई में रहता है मास्टरमाइंड

उन्होंने बताया, 'हमने दुबई में रहने वाले हामिद अशरफ नामक एक व्यक्ति की पहचान की है। उसके इस रैकेट का मास्टमाइंड होने का संदेह है। उसे 2016 उप्र के बस्ती से सीबीआई, रेलवे विजिलेंस तथा स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वह नेपाल के रास्ते दुबई भाग गया था।

तबलीक-ए-जमात से जुड़ा रहा है मुस्तफा

आरपीएफ डीजी ने बताया कि मुस्तफा से एनआईए, कर्नाटक पुलिस तथा इंटेलिजेंस ब्यूरो की पूछताछ में सामने आया था कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के लिए पैसे को डार्कनेट के जरिए क्रिप्टो करंसी में बदल लेता था। वह पाकिस्तानी संगठन तबलीक-ए-जमात से जुड़ा रहा है, जिसके सदस्य पाकिस्तान, बांग्लादेश, खाड़ी देशों, इंडोनेशिया तथा नेपाल में भी हैं। उसके पास फर्जी आधार तथा पैन कार्ड बनाने का भी सॉफ्टवेयर था। उसके लैपटॉप में कई पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर तथा अनेक एनक्रिप्टेड (गोपनीय) संदेश भी मिले हैं। आरपीएफ ने उस सॉफ्टवेयर कंपनी का भी पता लगा लिया है, जो इस ग्रुप से पैसे लेती है। सिंगापुर पुलिस मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उस कंपनी की जांच कर रही है।

उन्होंने बताया, 'हमने गुरुजी नामक एक अन्य व्यक्ति को भी ट्रेस किया है, जो इस ग्रुप का टेक्निकल एक्सपर्ट माना जाता है। उसे हाल ही में मुस्तफा से 13 लाख रुपए मिले हैं। गुरुजी पहचान छिपाने के लिए युगोस्लाविया का वीपीएन इस्तेमाल करता था। उस पर बांग्लादेशी नागरिकों के इलाज के नाम पर अंग व्यापार करने का भी शक है।"

Posted By: Yogendra Sharma

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