जम्मू। कश्मीर में 19 जनवरी 1990 से शुरू हुए निर्वासन के बाद करीब चार लाख कश्मीरी पंडितों को भागकर शरणार्थियों के रूप में घाटी में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। आतंकवाद के खिलाफ तत्कालीन केंद्र सरकार ने कोई ऐसा कदम नहीं उठाया था, जिससे उनकी रक्षा होती। मस्जिदों से काफिरों कश्मीर छोड़ो के नारे लगाने के साथ ही कहा जाता था कि हमें कश्मीरी पंडितों की औरतों के साथ कश्मीर चाहिए। तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद, मुख्यमंत्री फारुख अबदुल्ला सहति कोई नेता इस पर कुछ नहीं बोला। आज 30 साल बाद भी वह दर्द ताजा है और उस पर कोई मरहम नहीं लगा है। इस दिन को मनाने के लिए हजारों कश्मीरी पंडित प्रदर्शन कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर 'हम वापस आएंगे' (#HumWapasAayenge) ट्रेंड कर रहा है। इसमें लोग अपनी कहानी साझा कर रहे हैं कि उन्हें कैसे वहां से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। घाटी में लौटने की उनकी इच्छा और कश्मीरी पंडितों के निर्वासन पर बनी फिल्म शिकारा की क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। अब जबकि जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश बन चुके हैं, तो कश्मीरी पंडित एक बार फिर अपने घरों में वापस लौटना चाहते हैं। वे ट्विटर पर अपनी कहानियां साझा कर रहे हैं।

1990 के दशक में जब कश्‍मीर में आतंकवाद फैल रहा था और कश्मीरी पंड़ितों को अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। जो नहीं भागे, वे मार दिए गए। महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। लाखों की तादात में लोगों को अपने घर, जमीन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। रातों-रात वे अपने ही देश में शरणार्थी बन गए। तीन दशक गुजरने के बाद भी इनके दर्द ताजा हैं और इस पर कोई मलहम नहीं लगा है।

मगर, इन लोगों को उम्‍मीद है कि एक दिन ये अपने उसी घर में वापस जाएंगे, जहां उनका बचपन बीता। हर साल 19 जनवरी को कश्‍मीरी पंडित विस्‍थापन दिवस के रूप में मनाते हैं। हाल ही में रिलीज फिल्‍म 'शिकारा' भी इन्‍हीं लोगों की जिंदगी की कहानी को बयां करती है।

राजेश रैना नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा- मैंने कुछ साल पहले इस वीडियो को अपने मूल स्थान #Anantnag जिले में शूट किया था। हमारे घर को आतंकवादियों ने मलबे में बदल दिया था। जब हमें #कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, तो इसे लूट लिया गया और जला दिया गया। एक दिन हम सम्मान और सम्मान के साथ वापस जाएंगे। #HumWapasAayenge #Shikara #KashmiriPandits

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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