पूर्व क्रिकेटर और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की हालत बेहद गंभीर है। चौहान को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। कोरोना पॉजिटिव के कारण लम्बे समय से संजय गांधी पीजीआइ में भर्ती रहे चौहान की किडनी ने काम करना बंद कर दिया है। उनको लखनऊ से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, जहां पर उनको लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। 11 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनको संजय गांधी पीजीआई में एडमिट कराया गया था। इसके बाद उन्हेंं किडनी और ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो गईं। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की हालत गंभीर है। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में चौहान के पास सैनिक कल्याण, होमगार्ड, पीआरडी और नागरिक सुरक्षा मंत्रालय हैं। अमरोहा से चेतन चौहान भाजपा के सांसद भी रहे हैं। चेतन चौहान भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। चेतन चौहान भारतीय जनता पार्टी से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। 1991 और 1998 के चुनाव में वह भाजपा के टिकट अमरोहा से सांसद बने थे। चेतन चौहान अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा के विधायक हैं।

73 साल के चेतन चौहान ने भारत के लिए 40 टेस्ट मैच और 7 वनडे मैच खेले थे। पिछले साल तक वो यूपी के स्पोर्ट्स मिनिस्टर थे, लेकिन बाद में उन्हें दूसरा मंत्रालय दे दिया गया था। वो भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं और दो बार लोकसभा एमपी भी रह चुके हैं।

चेतन चौहन ने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू साल 1969 में न्यूजीलैंड के खिलाफ किया था। अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 31.57 की औसत से 2084 रन बनाए थे। टेस्ट क्रिेकेट में उनके नाम पर कोई शतक नहीं है जबकि उन्होंने 16 अर्धशतक लगाए थे। इसके अलावा भारत के लिए 7 वनडे मैचों में उन्होंने कुल 153 रन बनाए थे।

चेतन चौहान ने भारत के आखिरी मैच साल 1981 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इस टूर के बाद चौहान को टीम से ड्रॉप कर दिया गया और फिर कभी उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिला। घरेलू मैचों में उनका रिकॉर्ड काफी शानदार था और उन्होंने 179 फर्स्ट क्लास मैचों में 40.22 की औसत से 11 हजार से भी ज्यादा रन बनाए।

घरेलू मैचों में उन्होंने 21 शतक और 59 अर्धशतक भी लगाए थे। 1981 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया था और इसके बाद उन्होंने राजनीति का रुख कर लिया। वो साल 1991 और 1998 में बीजेपी की टिकट पर दो बार लोकसभा का चुनाव जीतकर एमपी भी बने।

Posted By: Navodit Saktawat

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