Mid Day Meal : केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय मिड-डे मील योजना से जुड़े इन सभी बदलावों को लेकर तेजी से काम कर रहा है। राज्यों से योजना के बाबत सुझाव मांगे गए हैं। मंत्रालय ने राज्यों के साथ मिड-डे मील को लेकर यह चर्चा तब शुरू की है, जब हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली बच्चों को पौष्टिक नाश्ता भी उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। स्कूली बच्चों को अब पोषण की कमी से नहीं जूझना होगा। केंद्र सरकार ने मिड-डे मील योजना के तहत स्कूली बच्चों को नाश्ता उपलब्ध कराने की तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत स्कूलों में अब प्री-प्राइमरी से ही बच्चों को नाश्ता और खाना मिलेगा। अभी इस योजना में सिर्फ पहली से आठवीं तक के बच्चे ही शामिल हैं, जिन्हें सिर्फ दोपहर का भोजन दिया जाता है। अब पूरी योजना की नए सिरे से समीक्षा भी की जाएगी। ऐसा माना गया है कि स्कूलों में अभी बड़ी संख्या में बच्चे नाश्ता करके नहीं आते। ऐसे में यदि बच्चों को नाश्ता दिया जाता है तो सेहत सुधरने के साथ ही इनका स्कूल से जुड़ाव भी बढ़ेगा। इसी तरह स्कूली शिक्षा के दायरे को बढ़ाकर इसमें प्री-प्राइमरी को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है।

ऐसे में प्री-प्राइमरी के बच्चों को भी मिड-डे मील योजना से जोड़ने की पहल शुरू कर की गई है। स्कूली बच्चों के लिए शुरू की गई यह मिड-डे मील योजना फिलहाल पूरी तरह से केंद्रीय मदद से संचालित है। राज्यों को सिर्फ भोजन बनाने पर आने वाले खर्च में ही हिस्सा देना होता है। मौजूदा समय में इस योजना के तहत देश के करीब 12 लाख स्कूलों में करीब 11.6 करोड़ बच्चों को दोपहर का खाना उपलब्ध कराया जाता है।

100 व 150 ग्राम चावल मिलते हैं प्रतिदिन

एमडीएम योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा के लिए डाइट चार्ट बना हुआ है। पहली से पांचवीं के विद्यार्थियों को 100 ग्राम चावल और छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 150 ग्राम चावल प्रतिदिन मिलते हैं। सब्जी 60 ग्राम, दाल 30 ग्राम, घी पांच ग्राम, नमक तीन ग्राम, मसाला दो ग्राम, प्याज 10 ग्राम, ड्राई फ्रूट छह ग्राम प्रति विद्यार्थी दिया जाता है। प्री प्राइमरी कक्षाओं के लिए ताजे फल, ड्राई फ्रूट, दलिया और खिचड़ी को डाइट चार्ट में शामिल किया है।

कोरोना काल के बीच 25 हजार विद्यार्थियों को नहीं मिला मिड-डे मील का राशन

Himachal Pradesh में कोरोना महामारी के बीच शिक्षा विभाग पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को घर पर जाकर मिड-डे मील (एमडीएम) का राशन पहुंचा रहा है। राशन के साथ कुकिंग कास्ट भी दी जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग 3700 स्कूलों में प्री प्राइमरी कक्षाओं के 25 हजार विद्यार्थियों को मिड-डे मील देना ही भूल गया है। एमडीएम के तहत बच्चों को दोपहर के खाने में क्या दिया जाएगा, इसका डाइट चार्ट ही तैयार नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बजट भाषण में घोषणा की थी कि प्री प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को भी मिड-डे मील दिया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के पास इस योजना के लिए 11 करोड़ का बजट भी है। पिछले सप्ताह शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह मुद्दा उठा था। शिक्षा मंत्री ने एसएसए और प्रारंभिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि इसके लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू की जाए।

एसएसए ने डाइट चार्ट तैयार कर मंजूरी के लिए सरकार को भेज दिया है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद प्री प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को मिड-डे मील के राशन का आवंटन शुरू कर दिया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक, एसएसए आशीष कोहली का कहना है प्री प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को जल्द ही मिड-डे मील का राशन दिया जाएगा। यदि स्कूल नहीं खुलते तो घरों तक राशन पहुंचाया जाएगा। सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा गया है। डाइट चार्ट मंजूर होने के बाद इसका आवंटन शुरू कर दिया जाएगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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