Uttarakhand Rainfall : उत्तराखंड में पिछले दो-तीन दिनों में हुई भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अब तक 34 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5 लापता हैं। उत्तराखंड सरकार ने मरनेवालों के परिजनों को 4-4 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है। वहीं जिनके घर बर्बाद हो गये हैं, उन्हें 1.9 लाख की राहत राशि मिलेगी। पशुओं के लापता या नुकसान की स्थिति में भी राज्य सरकार नुकसान के आधार पर मदद करेगी। इससे पहले मुख्यमंत्री ने खुद हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ और बारिश के हुई तबाही का जायजा लिया। पुलिस और प्रशासन बाढ़ और बारिश में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, और तमाम सड़कें पानी और मलबे से भर गई हैं। कई शहरों का संपर्क टूट गया है, पुल बह गये हैं और नदियां उफान पर हैं। स्थानीय लोगों के अलावा सैकड़ों टूरिस्ट भी जगह-जगह फंस गये हैं।

नैनीताल में स्थिति काफी खराब है। सबसे ज्यादा जान का नुकसान इसी जिले में हुआ है। नैनी झील का पानी सड़कों और घरों तक पहुंच गया है। तमाम रास्ते बंद हो गए हैं और बिजली भी गुल है। खतरे को देखते हुए लोगों से घरों के भीतर रहने की अपील की गई है। बारिश के कारण नैनीताल, रानीखेत, अल्मोड़ा से हल्द्वानी और काठगोदाम तक के रास्ते बंद हो गए हैं। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि रामनगर-रानीखेत मार्ग स्थित लेमन ट्री रिजॉर्ट में करीब 200 लोग फंस गए थे। इन सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है। बारिश की वजह से कोसी नदी का पानी रिजॉर्ट में घुस गया था और अंदर जाने या बाहर आने का रास्ता बंद हो गया है।

उत्तराखंड में कई जगहों पर लगातार हो रही बारिश से परेशानी बढ़ती जा रही है और कई जगहों पर यात्रियों के फंसने की ख़बरें आ रही हैं। प्रशासन ने गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर मंदाकिनी नदी के दूसरी तरफ़ फंसे घायल यात्रियों समेत कई लोगों को भी बाहर निकाला। अभी भी कई इलाकों में लोगों के फंसे होने और लापता होने की खबरें मिल रही हैं। पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर उत्तराखंड में लोगों के मरने और तबाही पर अफसोस जताया है।

Posted By: Shailendra Kumar