नई दिल्ली। जामिया समन्वय समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जामिया हिंसा मामले में लगातार नए वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में दिल्ली पुलिस और पैरा मिलिट्री के जवान जामिया विश्वविद्यालय के अंदर लाइब्रेरी में घुसकर छात्रों की डंडे से पिटाई कर रहे हैं। वहीं स्टूडेंट्स के हाथो में पत्थर भी नजर आए हैं। दो महीने बाद वीडियो वायरल करने से सवाल उठाए जा रहे हैं कि यह शाहीन बाग मामले को फिर से तूल देने की कोशिश तो नहीं है। अब इसे लेकर सियासत गरमाने लगी है। असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस पूरे मामले में झूठ बोलती रही है, उस पर एफआईआर होना चाहिए। वहीं कपिल सिब्बल ने भी इसे लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है।

भाजपा ने किया बचाव

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोपों के बीच भाजपा के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा ने कहा कि कांग्रेस और अन्य पार्टियां इस मामले पर राजनीति कर रही हैं, जिसकी हम निंदा करते हैं।

अब तक सामने आए 4 वीडियो

जामिया हिंसा में अब तक चार वीडियो सामने आ चुके हैं। इसे लेकर अब लगातार बयानबाजी भी सामने आ रही है। रविवार को जहां तीन वीडियो सामने आए थे वहीं सोमवार को भी एक वीडियो सामने आया है। इसे लेकर कांग्रेस भी मोदी सरकार पर हमलावर हो गई है।

क्राइम ब्रांच आयुक्त ने कही थी यह बात

क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त प्रवीर रंजन ने रविवार को कहा था कि एसआइटी की जांच दायरे में अगर यह वीडियो नहीं हैं तो इनको भी शामिल कर लिया जाएगा। शनिवार रात 9 बजे जामिया समन्वय समिति ने ट्वीटर पर पहले 59 सेकेंड का एक वीडियो अपलोड किया, फिर रविवार सुबह 38 सेकेंड का दूसरा वीडियो डाला। दोनों वीडियो 15 दिसंबर की शाम छह बजे के हैं।

पुलिस पर लगे थे मारपीट के आरोप

जामिया हिंसा के बाद छात्र-छात्राओं के साथ जामिया प्रशासन ने भी आरोप लगाते हुए कहा था कि पुलिसकर्मियों ने लाइब्रेरी में घुसकर स्टूडेंट्स की बुरी तरह पिटाई की है। क्राइम ब्रांच ने 19 दिसंबर को जामिया प्रशासन से लाइब्रेरी के फुटेज सौंपने का अनुरोध किया था, लेकिन जामिया प्रशासन ने इससे इंकार कर दिया था। अब घटना के लगभग दो महीने बाद समिति ने एक-दो वीडियो को एडिट कर केवल उसी हिस्से को वायरल किया है।

Posted By: Neeraj Vyas