Know who is Sachin Pilot: सचिन पायलट पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में बने हुए हैं। उप मुख्यमंत्री Sachin Pilot द्वारा अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलने की वजह से राजस्थान में Ashok Gehlot की कांग्रेस सरकार खतरे में आ गई है। सचिन पायलट अपने कई सर्मथक विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात का समय मांगा, जो उन्हें नहीं दिया गया। इसके बाद Sachin Pilot ने अपने साथ 30 कांग्रेसी विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए कहा था कि अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में आ गई है।

मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनदेखी की वजह से कमलनाथ की कांग्रेस की सरकार चली गई थी। इसी तर्ज पर माना जा रहा है कि राजस्थान में Sachin Pilot की अनदेखी कांग्रेस को भारी नहीं पड़ जाए। सचिन पायलट ने साल 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने उनकी अनदेखी कर वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया था। सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन तब से उनकी और अशोक गहलोत की पटरी कभी नहीं बैठी। मुख्यमंत्री गहलोत लगातार उनकी अनदेखी करते रहे, दूसरी तरफ पायलट लगातार अपनी ही सरकार को घेरते रहे। राज्य के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की ओर से सरकार गिराने की कोशिश के आरोपों की जांच में सचिन पायलट को नोटिस जारी होने की वजह से यह तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। वैसे इस जांच में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी नोटिस भेजा गया था, लेकिन साल 2018 में सरकार बनने के वक्त से ही अनदेखी झेल रहे सचिन पायलट ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया।

इसके बाद Sachin Pilot अपने कांग्रेस समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे, जहां कांग्रेस अध्यक्ष से उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया। जयपुर में रविवार देर रात कांग्रेस पार्टी ने सोमवार सुबह विधायक दल की बैठक बुलाई और इसमें सभी विधायकों की उपस्थिति के लिए व्हिप जारी किया गया। इसके मुताबिक, यदि कोई विधायक बिना विशेष परिस्थिति के इस बैठक में अनुपस्थित रहा तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पायलट ने अपनी ही सरकार को कई बार घेरा:

राजस्थान के उप मुख्यमंत्री होने के बावजूद सचिन पायलट ने कई मौकों पर अपनी ही सरकार को घेरा। कोटा में बच्चों की मौत का मामला हो या फिर बाड़मेर, नागौर में दलितों के साथ मारपीट का प्रकरण हो, पायलट ने अपनी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। बढ़ते भ्रष्टाचार और विधायकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होने के मामले पर भी पायलट ने सरकार की सार्वजनिक रूप से आलोचना की।

सचिन पायलट का राजनीतिक करियर:

सचिन पायलट ने पहली बार साल 2004 में दौसा क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वे उस समय 26 साल की उम्र में देश के सबसे युवा लोकसभा सदस्य बने थे। उन्होंने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के किरण माहेश्वरी को 76000 वोटों से हराया। वे 2012 में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री बने थे। 2014 के मोदी लहर में लोकसभा चुनावों में सचिन पायलट को सांवरलाल जाट के हाथों 171983 वोटों से करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। 2018 के विधानसभा चुनावों में सचिन पायलट ने टोंक क्षेत्र से यूनुस खान को 54179 वोटों से हराया। ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा लेकिन अशोक गहलोत को प्राथमिकता दी गई। 17 दिसंबर 2018 को उन्हें उप मुख्यमंत्री बनकर संतुष्ट होना पड़ा।

निजी जीवन:

सचिन पायलट का जन्म 7 सितंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था। उनके पिता स्व. राजेश पायलट पूर्व केंद्रीय मंत्री थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में हुई। उन्होंने इसके बाद सेंट स्टीफेंस कॉलेज से B.A की डिग्री हासिल की। उन्होंने इसके बाद IMT गाजियाबाद से मार्केटिंग में डिप्लोमा हासिल किया। सचिन पायलट ने इसके बाद अमेरिका के फिलाडेल्फिया में पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से MBA किया था। उनकी 15 जनवरी 2004 को सारा अब्दुल्ला से शादी हुई, जो जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah की बेटी हैं। उनके दो बेटे हैं।

प्रादेशिक सेना में अधिकारी:

Sachin Pilot 6 सितंबर 2012 को भारत की प्रादेशिक सेना (Territorial Army) में अधिकारी के रूप में नियुक्त (commissioned) होने वाले पहले क्रेंदीय मंत्री बने थे। इसी वजह से उन्हें लेफ्टिनेंट पायलट के रूप में भी जाना जाता है।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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