LIVE Dussehra News: देश भर में सार्वजनिक दशहरा उत्‍सव समितियों द्वारा रावण दहन का कार्यक्रम आरंभ कर दिया गया। इसके अलावा कॉलोनियों, मोहल्‍लों में भी रावण दहन हुए। कई शहर ऐसे भी हैं जहां सोमवार को रावण दहन होगा। इस बार तिथियों की घटबढ़ के कारण यह स्थिति बनी है। पंचांग के मुताबिक, नवमी तिथि रविवार तक थी। इस तरह लोगों ने रविवार को पूजा की और अब सोमवार को दशहरा मनाया जा रहा है। ऐसे शहरों में इलाहाबाद भी शामिल है। इससे पहले रविवार को कोरोना महामारी से जुड़ी गाइडलाइन का पालन करते हुए दशहरा मनाया गया। अधिकांश शहरों में महज औपचारिकता के लिए रावण दहन किया गया। लोगों ने दूर से ही एक दूसरे को बधाई दी। आज देश भर में दशहरे या विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। कोरोना संकट को देखते हुए सारी सावधनियों को ध्‍यान में रखकर त्‍योहार मनाया जा रहा है। हर साल की तरह इस साल भी रावण दहन के आयोजन तो हो रहे हैं लेकिन मॉस्‍क और शारीरिक दूरी का पूरा ध्‍यान रखा जा रहा है।

139 साल में पहली बार एक साथ हुआ पुतला दहन

होशंगाबाद, बलराम शर्मा

राम लीला मैदान पर सोमवार शम करीब 5.30 बजे एक साथ रावण, कुंभकरण व मेघनाद का पुतला दहन किया गया। 139 साल में पहला मौका है जब दशहरा के असर पर तीनों पुतला एक साथ जलाए गए हों। परंपरा अनुसार तीन अलग-अलग दिन में पुतला दहन किया जाता था। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के चलते इस बार कई नियम तय कि गए थे। तीनों पुतलसों की ऊंचाई कम रखी गई है। पुतला दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ रामलीला मैदान पर उमड़ पड़ी थी। रामलीला का मंचन भी महज एक घंटे के अंदर पूरा किया। विधायक डॉ सीतासरण शर्मा ने पुतला दहन किया। आयाेजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मैदान के अंदर सिर्फ उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया गया था जो रामलीला मंचन से जुड़े हुए थे। पूर्व में दशहरा मैदान में तीन दिन रामलीला का आयोजन किया जाता था। रामलीला को देखने के लिए दूर दराज से भी लोग होांगाबाद आए थे। प्रशासन व पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम किए थे। सिटी कोतवाली, देहात थाना व पुलिस लाइन के बल को मैदान के आसपास तैनात किया गया था। यातायात व्यवस्था बाधित ना हो इसके लिए यातायात अमला तैनात रहा। इस बार दुर्गा प्रतिमाओं को रामलीला मैदान में नहीं लाया जा रहा है। दुर्गा समितियों को सीधे विसर्जन करने के लिए कहा जा रहा है। तहसीलदार शैलेंद्र बड़ोनिया ने बताया कि अलग-अलग घाटों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए व्यवस्था कर ली गई है।

कौशांबी में 241 वर्ष से हो रहा रामलीला महोत्सव एवं दशहरा मेला

प्रयागराज कौशांबी जनपद के ऐतिहासिक कस्बा दारानगर में 241 वर्ष से बिना किसी बाधा के लगातार रामलीला महोत्सव एवं दशहरा मेला का आयोजन हो रहा है। इस वर्ष कोविड-19 के चलते तमाम तरह के धार्मिक आयोजन नहीं हो सके। रामलीला का मुख्य आकर्षण दो दिवसीय कुप्पी युद्ध रविवार से शुरू हुआ। रोमांचकारी कुप्पी युद्ध को देखने के लिए सैकडों पहुंचे। कुप्पी युद्ध में राम दल की सेना लाल व रावण दल की सेना काले वस्त्रों में थी है। पहले दिन दोनों सेनाओं के बीच 10-10 मिनट के चार चरण में युद्ध हुआ। युद्ध के बीच लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध, लक्ष्मण शक्ति लीला, सती सुलोचना आदि लीला का संपादन हुआ।

दवा का काम करती है रणभूमि की मिट्टी

दारानगर की रामलीला में दो दिवसीय कुप्पी युद्ध में श्रीराम व रावण की सेना के बीच सात लड़ाई होती है। पहले दिन चार चरणों में लड़ाई होती है। चारों लड़ाई रावण की सेना जीतती है। दूसरे दिन की तीन लड़ाई में राम की सेना विजय प्राप्त करती है। राम व रावण दोनों ही दल में 10-10 सेनानी होते हैंं युद्ध इतना विकराल होता है कि देखने वालो के रोंगटे खड़े हो जाते हैंं। युद्ध में सेनानी घायल भी हो जाते हैंं। घायल होने वाले लोगों को रणभूमि की मिट्टी लगाया जाता है। मान्यता है कि ये मिट्टी दवा का काम करती है। इसी मिट्टी से घाव ठीक हो जाता है।

लखनऊ: यहां विजयादशमी समारोहों के लिए ऐशबाग राम लीला ग्राउंड पर रावण के पुतले बनाए गए हैं। साथ ही कोरोनोवायरस की चित्रात्मक प्रस्तुति दिखाई गई है। आयोजकों का कहना है कि रावण दहन भीड़ से बचााने के लिए ऑनलाइन स्ट्रीम किया जाएगा।

नीमच : मप्र के नीमच में दशहरा मैदान पर हुआ रावण दहन। समाजसेवी,कलेक्टर व अन्य लोग थे मौजूद। आम जनता बेहद सीमित संख्या में पहुंची। निजी चैनल ने किया लाइव प्रसारण।

इंदौर: दशहरा मैदान पर होलकर राजवंश के शमी पूजन शुरू। पूजन के बाद ही होता है रावण दहन। एकता सहयोग समिति ने उषागंज छावनी में 21 फीट के कटआउट का रावण बनाया जिसका 7 बजे दहन किया गया।

प्रयागराज : विजयादशमी पर प्रयागराज में कोरोना रूपी रावण का दहन किया गया। रामलीला में दम्भ, अत्याचार व बुराई के प्रतीक रावण के वध की लीला हुई। श्रीदारागंज रामलीला कमेटी ने कोरोना महामारी रूपी रावण के पुतले का दहन कराया। लीला स्थल पर प्रभु श्रीराम राम ने रावण के पुतले को तीर मारा तो वो धू-धू करके जलने लगा। मौके पर मौजूद दर्शकों ने भगवान श्रीराम का जयकारा लगाकर खुशी व्यक्त की।

पजावा इसी प्रकार श्रीमहंत बाबा हाथीराम पजावा रामलीला कमेटी के तत्वाधान में इस वर्ष कोविड-19 को ध्यान में रखकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रावण वध पजावा राम लीला मैदान अतरसुइया के प्रांगण में कराया गया। कमेटी ने इस बार राम लीला नहीं कराया। लेकिन रावण वध की परंपरा का निर्वहन किया।

- नोएडा के सेक्‍टर 21 में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया।

पंजाब: दशहरा पर आज लुधियाना के दरेसी दशहरा ग्राउंड में रावण का 30 फीट लंबा पुतला जलाया गया।

दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचे भक्त

माँ दुर्गा पूजा पंडालों में रविवार को भी भक्तों की भीड़ रही। लूकरगंज, अल्लापुर, जार्जटाउन, अतरसुइया, मीरपुर सहित हर दुर्गा पूजा पंडाल में बच्चे, युवा व बुजुर्ग दर्शन पूजन के लिए पहुँचे। कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए माँ का दर्शन कर आशीष लिया। दुर्गा पूजा कमेटियां सोमवार को माँ की प्रतिमा का विसर्जन करेंगी। प्रशासन ने अंदावा स्थित तालाब में प्रतिमा विर्सजन की व्यवस्था की है। उसी तालाब में कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए विसर्जन किया जाएगा।

यहां रावण दहन नहीं होता, बल्कि ग्रामीण गाजे-बाजे के साथ पहुंचकर करते हैं पूजन

एक ओर जहां आज विजयदशमी के मौके पर पूरे देश में रावण के पुतलों का दहन किया जाता है, वहीं दूसरी ओर यहां पर एक स्थान ऐसा भी है जहां रावण के पुतले की पूजन की जाती है। गाजे-बाजे के साथ पहुंचकर ग्रामीण उनकी पूजन-अर्चना करते हैं। अंत में भाले से नाभी को टच करने के बाद कार्यक्रम समाप्त होता है। क्षेत्र की खुशहाली के लिए कामना करते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। नेशनल हाइवे क्रमांक 3 आगरा-मुंबई हाईवे पर स़डक किनारे वर्षों से एक खेत में रावण व कुंभकरण के पुतले बने हुए हैं। यहां पर विजयदशमी के दिन समीपस्थ ग्राम भाटखे़डी के ग्रामीण रामलीला के पात्रों के साथ रथ पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व हनुमान सहित वानर सेना के पात्र यहां गाजे-बाजे के साथ दोपहर में जुलूस के रूप में पहुंचते हैं। यहां पहुंचने के बाद करीब 2-3 घंटे रामलीला का मंचन होता है। इस मौके पर गांव के पटेल शिवनारायण यादव द्वारा रावण व कुंभकरण के पुतलों की विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चना की जाती है। इसके बाद प्रतीक स्वरूप उनकी नाभी को भाले से रामजी के पात्र द्वारा टच की जाती है व कार्यक्रम का समापन कर दिया जाता है। पहले थे मिटटी के पुतले, फिर करवाए पक्के यहां पर रावण व कुंभकरण के पहले मिटटी के पुतले हुआ करते थे। बारिश के समय वह बेकार हो जाते थे। ऐसे में दशहरा आने के पहले उन्हें ठीक करवाए जाते थे। लेकिन वर्षों पूर्व उन्हें फिर सीमेंट से पक्के बनवा दिए गए हैं, तब ही से वह उसी रूप में खेत में स्थापित है। हालांकि रंग-रोगन फीका प़डने पर उनका रंग-रोगन जरूर करवा दिया जाता है।

Posted By: Navodit Saktawat

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