Lockdown के बाद ऑनलाइन जालसाजी के केस सामने आने लगे हैं। ऐसी ही एक घटना हुई है जिसमें एक प्राइवेट कंपनी से लिंक मोबाइल नंबर को हैकर्स ने हैक कर लिया और देखते ही देखते 1 करोड़ से अधिक रुपयों पर हाथ साफ कर लिया। इस पैसे को उन्‍होंने तुरंत अलग-अलग राज्‍यों में बैंक खातों में जमा भी कर लिया। अधिकारी जब तक समझ पाते, यह ठगी हो चुकी थी। एक निजी कंपनी के बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर ने अचानक काम करना बंद कर दिया। निजी कंपनी के अधिकारी नया सिम कार्ड लेने की कोशिश कर ही रहे थे कि बैंक खाते से नेट बैंकिंग के माध्यम से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाल ली गई। यह राशि कई चरणों में निकाली गई है। पहले तो कंपनी के अधिकारियों ने इस मामले को नहीं समझा, क्योंकि उनके मोबाइल पर कोई मैसेज नहीं आया। जब तक उन्हें पता चला, तब तक धोखेबाजों ने रुपये निकाल लिए और कई लोगों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।

आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रोस सेटलमेंट) के माध्यम से कई खातों में (कुछ में नौ लाख, कुछ में 20 लाख) रुपये स्थानांतरित किए गए हैं। इस प्रकार एक करोड़ चार लाख रुपये विभिन्न खातों में स्थानांतरित किए गए। यह धनराशि बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात के विभिन्न निवासियों के बैंक खातों में जमा की गई है। जिन लोगों के बैंक खाते में रुपये स्थानांतरित किए गए हैं रोहित उनसे भी परिचित नहीं हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, धोखाधड़ी की शिकार होने वाली निजी कंपनी के प्रमुख रोहित अंचलिया ने कोलकाता के कसबा पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, उनकी कंपनी का राज्य के स्वामित्व वाले बैंक की राजडांगा शाखा में नकद-क्रेडिट खाता है। 29 और 30 जून, ये दो दिन उस खाते से दूसरे खाते में धनराशि कई चरणों में स्थानांतरित की गई। रोहित ने जांचकर्ताओं से दावा किया कि उन्होंने किसी को भी ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) या इंटरनेट बैंकिंग से संबंधित पासवर्ड या कोई अन्य गोपनीय जानकारी नहीं दी है।

अचानक निष्क्रिय हो गया था मोबाइल नंबर

जांच में पता चला कि 26 जून को कंपनी के बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर अचानक निष्क्रिय हो गया था। इसके बाद कंपनी के अधिकारी नया सिम कार्ड लेने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिम कार्ड निष्क्रिय करने और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंध हो सकता है, क्योंकि यदि आप नेट बैंकिंग में आरटीजीएस के माध्यम से धनराशि ट्रांसफर करना चाहते हैं, तो आपको पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल आइडी के साथ ओटीपी की जरूरत पड़ती है। अगर जालसाज मोबाइल नंबर क्लोन करते हैं, तो ओटीपी उनके पास जाएगा। हालांकि, उस स्थिति में जालसाज को कंपनी के नेट बैंकिंग खाते को भी हैक करना होगा। ऐसे में जांचकर्ता इसकी भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या कंपनी का कोई परिचित इसके पीछे है।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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