इस साल मानसून कैसा रहा है, इस सवाल का जवाब कई लोग जानना चाहते होंगे। पूरी तरह से मानसून का असर भी नहीं देखा ना ही पूरी तरह से सूखा रहा। जहां महाराष्‍ट्र और बिहार में बाढ़ और बारिश का तांडव रहा, वहीं उत्‍तर सहित मध्‍य भारत में शायद सामान्‍य बारिश भी नहीं हो पाई। ऐसे में यह तय कर पाना कठिन है कि इस साल मानसून कैसा रहा। सामान्‍य या सामान्‍य से भी कम। आइये आपको इसका जवाब बताते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने बुधवार को कहा कि इस साल चार महीने के मानसून के दौरान देश में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। आइएमडी के मुताबिक लगातार दूसरे साल और तीन दशक में तीसरी बार इतनी बरसात हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक देश में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 109 फीसद बरसात हुई है। एलपीए 1961 से 2010 यानी 50 साल के दौरान हुई बारिश का औसत है, जो 87.7 सेंटीमीटर है। एलपीए के 96 से 104 फीसद को सामान्य, 104-110 फीसद को सामान्य से अधिक और 110 फीसद ज्यादा को अत्यधिक बरसात कहा जाता है। 90 फीसद से कम को सामान्य से कम बारिश के रूप में दर्ज किया जाता है। विभाग ने कहा कि मानसून के चार में से तीन महीनों- जून (118 फीसद), अगस्त (127 फीसद) और सितंबर (104 फीसद) में सामान्य से अधिक बरसात हुई है। जुलाई में 99 फीसद बारिश हुई, जो सामान्य से कम है।

आइएमडी के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनडब्ल्यूएफसी) के विज्ञानी आरके जेनामणि ने कहा कि इस साल एक जून से 30 सितंबर के मानसून के दौरान एलपीए के 87.7 फीसद के मुकाबले 95.4 फीसद बरसात हुई। देश में 70 फीसद बारिश दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान ही होती है, जो कृषि के लिए बहुत ही अहम है। देश की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का 14 फीसद योगदान है और देश की आधी से अधिक आबादी को इससे रोजगार मिला हुआ है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक खरीफ की फसल के लिए बरसात बढ़िया रही, किसानों ने इस साल अधिक रकबे 1,116.88 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की है, जो पिछले साल के 1,066.06 लाख हेक्टेयर के मुकाबले ज्यादा है।

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