Mustard oil Price : कोविड-19 महामारी के चलते खाद्य तेल बाजार में बड़ा बदलाव आया है। देश में लॉकडाउन खुलने से अब तक सरसों तेल के भाव 12 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं और ट्रेंड जारी रहने के आसार हैं। उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत आने वाले उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अप्रैल के दौरान पैकिंग में एक किलो सरसों तेल की औसत कीमत 117.95 रुपये थी, जो नवंबर में बढ़कर 132.66 रुपये प्रति किलो हो गई। इस हिसाब से पिछले आठ महीनों के दौरान सरसों तेल के औसत भाव 12.47 प्रतिशत बढ़ गए हैं। इसके मुकाबले पिछले साल की समान अवधि में सरसों तेल के भाव महज 3.89 प्रतिशत बढ़े थे। दरअसल कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया में खाद्य तेल की खपत का पैटर्न बदला है। लोग घर की रसाई में तैयार खाने को तरजीह देने लगे हैं और होटलों में पके खाने से बच रहे हैं। इस बदलाव का असर सरसों तेल की खपत और कीमत पर हो रहा है। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ विश्लेषक विनोद टीपी ने सरसों तेल की कीमतें बढ़ने की तीन प्रमुख वजहें बताईं:

1. घरेलू मांग में तगड़ा इजाफा होना

2. 2019-20 के रबी सीजन में सरसों की कम खेती

3. सरसों तेल में अन्य खाद्य तेल मिलने पर पाबंदी

अचानक पलटा रुझान

हालांकि 2020 के शुरुआती महीनों के दौरान सरसों की भारी बिकवाली हुई थी। लेकिन, जब से सरकार ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में छूट की शुरुआत की तब से इसके भाव बढ़ने शुरू हो गए। इसके अलावा कमजोर आपूर्ति के बीच सरकारी एजेंसी नैफेड ने इस तिलहन की खरीदारी भी की।

खान-पान में बदलाव का असर

विनोद के मुताबिक लॉकडाउन खुलने के बाद खान-पान के तौर-तरीकों में बड़ा फर्क आया। घर से बाहर जाकर खाने का चलन कम हुआ। लोग घर के खाने को तरजीह देने लगे। इसकी वजह से सोयाबीन तेल, सनफ्लावर ऑयल और सरसों तेल की मांग तेजी से बढ़ी। इसके अलावा लॉकडाउन के चलते पिछले रबी सीजन में तिलहन की खेती भी पिछड़ गई थी, जिसका सीधा असर इनके उत्पादन पर हुआ। इससे सरसों तेल की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट मिला। भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ के अध्यक्ष सुधाकर राव देसाई के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से सरसों तेल को लेकर आकर्षण बढ़ा है। लोगों को लगता है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित होता है।

पिछले 10 वर्षों (अप्रैल और नवंबर के बीच) के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालने से पता चलता है कि तीन वर्ष (2011, 2015 और 2020) ऐसे रहे, जब सरसों तेल की कीमतों में 11 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा हुआ। अप्रैल-जून, 2015 के दौरान इसकी कीमत 13.60 प्रतिशत और 2011 में 11.78 प्रतिशत बढ़ी थी।

Posted By: Navodit Saktawat

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