नई दिल्ली। Nisarga Cyclone: अरब सागर से उठा चक्रवात निसर्ग बुधवार दोपहर बाद मुंबई के निकट अलीबाग में जमीन से टकराने के बाद कमजोर पड़ गया। इस तूफान का ज्यादा असर महाराष्ट्र में रहा जबकि गुजरात, केंद्र शासित दमन व दियु और दादर नगर हवेली नुकसान से बच गए। महाराष्ट्र में सैकड़ों स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। चपेट में आकर दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इस दौरान 3 लोगों के मरने और कई लोगों के घायल होने की जानकारी है। तूफान के कारण रेल व हवाई यातायात प्रभावित हुआ। कई जगह बिजली आपूर्ति भी लड़खड़ा गई। हालांकि जैसी आशंका जताई गई थी निसर्ग का वैसा प्रभाव देखने को नहीं मिला।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रदेशवासियों की हिम्मत और सरकारी मशीनरी के प्रयासों से हम लोग निसर्ग का सामना करने में कामयाब रहे हैं। कोंकण क्षेत्र से नुकसान की खबरें आ रही हैं। हम इनका आकलन करा रहे हैं। उधर एनडीआरएफ के प्रमुख एसएन प्रधान ने कहा कि इस तूफान का सबसे बुरा दौर निकल चुका है। हालात पूरी तरह नियंत्रित होने तक एनडीआरएफ की टीमें अपने मोर्चे पर डटी रहेगी।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि चक्रवात निसर्ग जब दोपहर बाद 12.30 बजे अलीबाग में जमीन से टकराया तो हवा की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा थी। 2.30 बजे तक हवाएं इसी रफ्तार से चलती रहीं। इस दौरान बारिश भी होती रही। विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि निसर्ग की रफ्तार शाम 4 बजे तक 90 से 100 किमी और शाम 6.30 तक 65 से 75 किमी प्रति घंटे तक रह गई थी। देर रात उत्तर मध्य महाराष्ट्र पहुंच कर यह तूफान और हल्का पड़ गया और हवाओं की रफ्तार मात्र 25 किमी प्रति घंटे रह गई।

महाराष्ट्र में मुंबई सहित सभी तटवर्ती जिलों में कुछ नुकसान जरूर हुआ, लेकिन निसर्ग का वैसा रौद्र रूप नहीं दिखा सका जैसी आशंका थी। करीब 40 हजार लोगों को समय से सुरक्षित स्थानों पर भेजे जाने से जान-माल का कम ही नुकसान हुआ है।

यह तूफान अंदरूनी महाराष्ट्र के सतारा, नासिक आदि जिलों की ओर मुड़ गया है, जहां मध्यम-तेज हवा के साथ बरसात हो रही है। रायगढ़ में तेज हवा से गिरे एक ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई है। इसी तरह पुणे में दो घटनाओं में दीवार गिरने से एक बुजुर्ग महिला मंजाबाई और छत गिरने से प्रकाश नामक पुरुष की मौत हो गई है। अन्य घटनाओं में 3 अन्य घायल हुए हैं। तूफान के कारण कई जिलों की बिजली आपूर्ति गड़बड़ा गई थी लेकिन शाम तक ज्यादातर इलाकों में आपूर्ति बहाल हो गई थी।

बता दें कि निसर्ग के बुधवार दोपहर तक महाराष्ट्र के तटवर्ती रायगढ़ जिले से टकराने की संभावना थी। आशंका जताई जा रही थी कि मुंबई से करीब 70 किलोमीटर दूर अलीबाग से टकराने के बाद यह मुंबई, पालघर होते हुए गुजरात के वलसाड़ एवं सूरत की ओर निकल जाएगा। लेकिन यह बुधवार को करीब 12.30 बजे अलीबाग पहुंचा। उस समय हवा की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा के लगभग थी। इस तूफान का असर गोवा की ओर महाराष्ट्र के रत्नागिरि एवं सिंधुदुर्ग जिलों तथा मुंबई की ओर पालघर तक पड़ा। तेज हवा के साथ मध्यम बरसात हुई।

अलीबाग, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि में सुबह से ही बरसात हो रही थी। रत्नागिरि एवं अलीबाग जैसे तटीय क्षेत्रों में इसका असर अधिक रहा। तेज हवाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे घरों की छतें उड़ गईं। रत्नागिरि में समुद्र में खड़ी एक बड़ी नौका जमीन पर आ गिरी। दक्षिण मुंबई क्षेत्र में भी कुछ इमारतों के ऊपर मानसूनी बरसात की तैयारियों के लिए डाले गए प्लास्टिक और तिरपाल उड़ते दिखाई दिए। तूफान का असर कम हो गया हैए लेकिन रायगढ़ के सांसद सुनील तटकरे ने लोगों से सावधान रहने का आह्वान किया है। उनके अनुसार तूफान एक बार फिर तीव्र हो सकता है।

पुणे-नासिक की ओर मुड़ा तूफान

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार तटवर्ती क्षेत्रों में करीब तीन-चार घंटे अपना असर दिखाने के बाद निसर्ग कमजोर पड़कर सतारा, पुणे एवं नासिक जैसे महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ गया। हालांकि मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ के कुछ इलाकों में रह-रह कर हल्की बरसात अभी भी देखी जा रही है। तेज हवा के कारण पेड़ गिरने की कई घटनाओं ने बीएमसी का काम बढ़ा दिया। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में कोरोना वायरस के रोगियों के लिए बनाया गया 1000 बिस्तरों वाले अस्पताल को काफी नुकसान पहुंचा है। यहां के रोगियों को तत्काल ही दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया था।

उड़ानें बाधित हुई

मुंबई विमानतल पर दोपहर बेंगलुरु से आया एक मालवाहक विमान रनवे पर फिसल गया। लेकिन कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज विमानतल से विमानों की आवाजाही ढाई बजे शाम सात बजे तक रोक लगाई गई थी। लेकिन मौसम सामान्य होने के बाद शाम छह बजे से विमानों का परिचालन शुरू कर दिया गया। इसी तरह पुणे एयरपोर्ट से कुछ उड़ानों को रद कर कुछ का समय बदला गया। ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित हुआ। कुछ टे्रनें विलंब से रवाना की गईं।

NDRF अभी भी तैनात

प्रशासन की तरफ से मुंबई सहित महाराष्ट्र के सभी तटवर्ती जिलों में सुरक्षा के लिए एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाल रखा था। मुंबई के सभी 6 बीचों पर लाइफ गार्ड भी तैनात किए गए थे। किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मुंबई के सभी पुलिस थानों पर पर्याप्त संख्या में श्रमिकों के साथ दमकल विभाग की गाड़ियां तैयार रहीं।

गुजरात में 64 हजार लोग हटाए

उधर गुजरात में निसर्ग से निपटने के लिए सूरत और वापी में उद्योग बंद रहे। हालांकि तूफान के दूसरी दिशा में मुड़ने से गुजरात के लिए खतरा नहीं रहा। संभावित खतरे वाले इलाकों से प्रशासन ने 64 हजार लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया। अतिरिक्त मुख्य सचिव पंकज कुमार ने बताया कि समुद्री सीमा वाले इलाकों में एनडीआरएफ की 18 तथा एसडीआरएफ की 6 टीमें तैनात तैनात की गई हैं। सूरत व वापी में सुरक्षा कारणों से रसायन व अन्य उद्योग बंद रखे गए। सूरत, वलसाड व अन्य शहरों में सुरक्षा कारणों से 236 विशाल होर्डिग्स व 120 हाई मास्ट लाइट उतार लिए गए हैं। राहत कमिश्नर हर्षद पटेल ने बताया कि टेलीकम्युनिकेशन विभाग की ओर से 17 लाख लोगों को सतर्कता के एसएमएस भेजे गए हैं।

Posted By: Rahul Vavikar

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