नई दिल्ली। अपने तहखानों में अकूत दौलत की वजह से सुर्खियों में आए केरल के तिरुवनन्तपुरम स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पद्मनाभस्वामी मंदिर में त्रावणकोर शाही परिवार का अधिकार पहले की तरह जारी रहेगा। यानी परंपरा के अनुसार शासक की मृत्यु पर परिवार का शबैत मतलब प्रबंधन का अधिकार बरकरार रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई समिति अंतरिम रूप से जारी रहेगी। शाही परिवार फाइनल समिति का गठन करेगा और तिजोरी बी को खोला जाए या नहीं, इस बात का निर्णय शाही परिवार द्वारा बनाई गई फाइनल समिति के द्वारा तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में केरल के तिरुवनन्तपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन के बीच विवाद पिछले नौ सालों से चल रहा था था। इस मामले में केरल हाईकोर्ट के फैसले को त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रु. की चल-अचल संपत्ति है। पद्मनाभस्वामी के नाम से विख्यात भगवान विष्णु के इस भव्य मंदिर का पुननिर्माण 18वीं सदी में त्रावणकोर शाही परिवार के द्वारा करवाया गया था।

स्वतंत्रता के बाद भी पद्मनाभस्वामी मंदिर का संचालन राजपरिवार नियंत्रित ट्रस्ट ही करता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की खंडपीठ ने पिछले साल 10 अप्रैल को इस मामले में केरल हाईकोर्ट के 31 जनवरी, 2011 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर, उसकी संपत्तियों का प्रबंधन संभालने और परंपराओं के अनुसार मंदिर का संचालन करने के लिए एक निकाय या ट्रस्ट बनाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था कि कि देश के सबसे अमीर मंदिर का प्रबंधन राज्य सरकार देखेगी या त्रावणकोर का पूर्व शाही परिवार। सुप्रीम कोर्ट में इस म्मामले को लेकर सुनवाई हुई कि क्या यह मंदिर सार्वजनिक संपत्ति है और इसके लिए तिरुपति तिरुमला, गुरुवयूर और सबरीमला मंदिरों की तरह ही देवस्थानम बोर्ड गठन करने की जरूरत है या नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों पर नियंत्रण से संबंधित हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने आदेश में कहा था कि मंदिर के खजाने में मूल्यवान वस्तुओं, आभूषणों का भी विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में 8 जुलाई 2011 को कहा था कि मंदिर के तहखाने-बी के खुलने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक जारी रहेगी, जुलाई 2017 में कोर्ट ने कहा था कि वह इन दावों का अध्ययन करेगा कि मंदिर के एक तहखाने में रहस्यमयी ऊर्जा वाला अपार खजाना मौजूद हैया नहीं।

Posted By: Yogendra Sharma

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