PM Modi All party Meet With JK Leaders: आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पहले बार जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ केंद्र सरकार की वार्ती हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुलाई जम्मू-कश्मीर के नेताओं की सर्वदलीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक में मांग विधानसभा चुनाव और पूर्ण राज्य के दर्जे पर केंद्रित रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से फिर भरोसा दिलाया गया कि परिसीमन होते ही चुनाव होंगे और सही वक्त आते ही पूर्ण राज्य का दर्जा भी मिल जाएगा। संवाद की इस शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया, अब न दिल्ली की दूरी होगी और न दिल की दूरी। बैठक के बाद सभी ने विश्वास जताया कि यह कश्मीर के लिए अच्छा होगा।

सभी के बोलने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह पहले ही कह चुके हैं कि राज्य में चुनाव भी होगा और उसे पूर्ण राज्य का दर्जा भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्य का दर्जा देने में चुनाव अहम कदम साबित होंगे। संकेत साफ था कि पूर्ण राज्य के दर्जे का फैसला चुनाव बाद होगा। दरअसल, आजाद ने चुनाव से पहले ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की थी।

आर्टिकल 370 पर नहीं रहा मुद्दा

जम्मू-कश्मीर में हाल में हुए जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कांफ्रेस समेत गुपकार गठबंधन के दलों ने भले ही अनुच्छेद-370 की वापसी की बात उठाई हो, लेकिन सच्चाई यह है कि अब वे भी मान चुके हैं कि इसकी वापसी नहीं हो सकती। यही कारण है कि पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस जैसे जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने प्रधानमंत्री के साथ गुरुवार को हुई बैठक में यह बात उठाई तो जरूर, लेकिन नेशनल कांफ्रेस ने साफ कर दिया कि वह कोई गैरकानूनी कदम नहीं उठाएगी, जो भी लड़ाई लड़नी होगी वह कानूनी रूप से लड़ेगी। हां, पीडीपी ने जरूर कहा कि वह संघर्ष करती रहेगी। जबकि कांग्रेस ने अनुच्छेद-370 की बात छेड़ने के बजाय सिर्फ डोमिसाइल की बात की।

बैठक की खास बातें :-

- करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक का तय नहीं था कोई एजेंडा

- विधानसभा चुनाव और पूर्ण राज्य के दर्जे पर रही केंद्रित

- सभी को यह अवसर दिया गया कि वे जो भी चाहें कहें

- सभी ने माना कि बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई

- मुख्य मांगों के प्रति सरकार ने भी दिखाया सकारात्मक रुख

प्रधानमंत्री ने रखे ये बिंदु

- राज्य में हो रहे विकास कार्यों पर जताया संतोष।

- जम्मू-कश्मीर के युवाओं को अवसर देने का वक्त आया है, लेकिन इसके लिए प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त शासन जरूरी।

- जम्मू-कश्मीर में निचले स्तर तक लोकतंत्र की बहाली करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता।

- सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के लिए कृतसंकल्प है इसीलिए पिछले महीनों में डीडीसी चुनाव भी हुए, आगे भी प्रक्रिया को बढ़ाना है।

- यह हर किसी की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि प्रदेश के हर वर्ग में सुरक्षा और विकास की भावना बढ़े।

- किसी एक की भी मौत दुखदायी होती है। सभी को मिलकर इसे रोकना होगा।

- सभी दल परिसीमन की चर्चा में जुटें और इसे तेज करें। (परिसीमन आयोग की पिछली बैठकों में नेशनल कांफ्रेंस के नेता शामिल नहीं हुए थे।)

ये 14 नेता हुए बैठक में शामिल

- फारूक अब्दुल्ला (नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री)

- उमर अब्दुल्ला (नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री)

- गुलाम नबी आजाद (कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री)

- महबूबा मुफ्ती (पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री)

- तारा चंद (कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री)

- मुजफ्फर हुसैन बेग (पीपुल्स कांफ्रेंस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री)

- निर्मल सिंह (भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री)

- कविंद्र गुप्ता (भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री)

- मुहम्मद यूसुफ तारीगामी (माकपा नेता)

- अल्ताफ बुखारी (जम्मू एवं कश्मीर अपनी पार्टी के प्रमुख)

- सज्जाद लोन (पीपुल्स कांफ्रेंस नेता)

- जीए मीर (जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख)

- रविंद्र रैना (जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रमुख)

- भीम सिंह (पैंथर्स पार्टी के नेता)

Posted By: Arvind Dubey

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