PM Modi West Bengal Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित दूर्गा पूजा समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इस मौके पर पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित किया। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम को सभी 294 सीटों पर प्रसारित किया गया। पीएम मोदी एक विशेष शुभेच्छा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल के मेरे भाइयों और बहनों आज भक्ति की शक्ति ऐसी है, जैसे लग रहा है कि मैं दिल्ली में नहीं लेकिन आज मैं बंगाल में आप सभी के बीच उपस्थित हूं। जब आस्था अपरम्पार हो, मां दुर्गा का आशीर्वाद हो, तो स्थान, स्थिति, परिस्थिति, से आगे बढ़कर पूरा देश ही बंगालमय हो जाता है:दुर्गा पूजा का पर्व भारत की एकता और पूर्णता का पर्व भी है। बंगाल की दुर्गा पूजा भारत की इस पूर्णता को एक नई चमक देती है, नए रंग देती है, नया श्रृंगार देती है। ये बंगाल की जागृत चेतना का, बंगाल की आध्यात्मिकता का, बंगाल की ऐतिहासिकता का प्रभाव है।

पढ़िए पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें

बंगाल की भूमि से निकले महान व्यक्तित्वों ने जब जैसी आवश्यकता पड़ी, शस्त्र और शास्त्र से, त्याग और तपस्या से मां भारती की सेवा की है। बंगाल की माटी को अपने माथे से लगाकर जिन्होंने पूरी मानवता को दिशा दिखाई, उन श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु, श्री ऑरोबिंदो, बाबा लोकनाथ, श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र, मां आनंदमयी को मैं प्रणाम करता हूं।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, शरद चंद्र चट्टोपाध्याय को मैं प्रणाम करता हूं। जिन्होंने समाज को नई राह दिखाई, उन ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, राजा राम मोहन राय, गुरुचंद ठाकुर, हरिचंद ठाकुर, पंचानन बरमा का नाम लेते हुए नयी चेतना जगती है।

आज अवसर है इन सबके सामने शीश झुकाने का जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को जीवंत किया, नई ऊर्जा से भर दिया ऐसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, शहीद खुदीराम बोस, शहीद प्रफुल्ल चाकी, मास्टर दा सूर्य सेन, बाघा जतिन को मैं नमन करता हूं।

हमारी मां दुर्गा ‘दारिद्रय दु:ख भय हारिणि’ कही जाती हैं, ‘दुर्गति-नाशिनी’ कही जाती हैं। अर्थात, वो दुखों को, दरिद्रता को, दुर्गति को दूर करती हैं। इसलिए, दुर्गापूजा तभी पूरी होती है जब हम किसी के दुख को दूर करते हैं, किसी गरीब की मदद करते हैं। महिषासुर का वध करने के लिए माता का एक अंश ही पर्याप्त था, लेकिन इस कार्य के लिए सभी दैवीय शक्तियां संगठित हो गई थीं। वैसे ही नारी शक्ति हमेशा से सभी चुनौतियों को परास्त करने की ताकत रखती है। ऐसे में सभी का दायित्व है कि संगठित रूप से सभी उनके साथ खड़े हों।

जपा के विचार यही है, संस्कार यही है और संकल्प भी यही है। इसलिए देश में आज महिलाओं के सशक्तिकरण का अभियान तेज गति से जारी है। रेप की सजा से जुड़े कानूनों को बहुत सख्त किया गया है, दुराचार करने वालों को मृत्युदंड तक का प्रावधान हुआ है। भारत ने जो नया संकल्प लिया है- आत्मनिर्भर भारत के जिन अभियान पर हम निकले हैं, उसमें भी नारी शक्ति की बहुत बड़ी भूमिका है।

22 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोलना हो या फिर मुद्रा योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को आसान ऋण देना हो। चाहे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान हो या फिर तीन तलाक के खिलाफ कानून हो। देश की नारीशक्ति को सशक्त करने के लिए निरंतर काम किया जा रहा है। ये बंगाल की ही धरती थी जिसने आज़ादी के आंदोलन में स्वदेशी को एक संकल्प बनाने का काम किया था। बंगाल की ही धरती से गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चटर्जी ने आत्मनिर्भर किसान और आत्मनिर्भर जीवन का संदेश दिया था।

बंगाल के लोगों को मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर काम हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बंगाल में करीब-करीब 30 लाख गरीबों के लिए घर बनाए जा चुके हैं। उज्जवला योजना के तहत करीब 90 लाख गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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