राज्यसभा में आज (बुधवार) किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) बिल 2021 पास हो गया है। इस बिल को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 15 मार्च 2021 को पेश किया था। बता दें इस बिल में बच्चों की देखरेख और संरक्षण की जरूरत से संबंधित प्रावधान हैं। इसमें बाल संरक्षण को मजबूत करने के उपाय दिए गए हैं। किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) बिल 2021 में प्रावधान है कि बोर्ड बच्चे की छानबीन करेगा। जिसपर कोई गंभीर आरोप है। बिल में जोड़ा गया है कि गंभीर अपराधों में ऐसे बच्चे शामिल होंगे। जिनकी अधिकतम सजा साल साल है और न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है। साथ ही बिल में प्रावधान है कि अपराध गैर संज्ञेय होंगे।

बच्चे गोद लेने का भी प्रावधान

किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) बिल 2021 में बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया भी निर्धारित की है। दत्तक माता-पिता द्वारा बच्चे को स्वीकार करने के बाद एडॉप्शन एजेंसी सिविल कोर्ट में गोद लेने का आदेश लेने के लिए आवेदन करती है। अदालत के आदेश के बाद ही प्रक्रिया शुरू होती है। बिल में प्रावधान है कि अब कोर्ट के स्थान पर जिला मेजिस्ट्रेट गोद लेने का आदेश जारी करेगा। इस बिल के अनुसार अगर विदेश में रहने वाला कोई शख्स भारत से अपने किसी परिचत के बच्चे को गोद लेना चाहता है। तो उसे अदालत ने आदेश लेना होगा। साथ ही बिल में प्रावधान है कि जिला मेजिस्ट्रेट के आदेश से संबंधित शख्स एक महीने के अंदर डिविजनल कमीश्नर के सामने अपील दायर कर सकता है। अपील दायर होने के बाद चार सप्ताह के अंदर इससे निपटाना होगा।

हर जिले में बाल कल्याण समिति गठित

किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) बिल 2021 में प्रावधान है कि बच्चों के हित के लिए प्रदेश के हर जिले में एक या उससे अधिक बाल कल्याण समिति गठित की जाएगी।

Posted By: Shailendra Kumar