अयोध्या ,नवनीत श्रीवास्तव। अयोध्या में विवाद का पटाक्षेप होते ही अब राम मंदिर को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है। जनमानस में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि श्रीराम का भव्य मंदिर कैसा होगा। हकीकत में राम मंदिर को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में चल रही है। मंदिर का नक्शा तैयार किया जा चुका है और इसके लिए पत्थरों को तराशने का काम अयोध्या में जारी है।

अयोध्या नाम में अकार, यकार और धकार को क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु और शिव से जोड़ा गया है। इनके किले, टीले और सरोवर का जिक्र पुराणों में हैं, यहां के प्रतापी राजा जननायक हुए। 491 साल पुराने विवाद का पटाक्षेप मंदिर के रूप में सुबह की ताजगी के एहसास सा आनंद देता है। सुप्रीम कोर्ट से जब सबसे बड़े और लंबे मुकदमे का फैसला आ चुका है तो यहां यह जानना भी काफी दिलचस्प है कि रामजन्मभूमि पर पांच सदी के बाद जो मंदिर बनेगा,उसका स्वरूप कैसा होगा। हम अब आपके मन में उठ रहे इन सभी सवालों का जवाब विस्तार से देते हैं।

जिस राममंदिर का ख्वाब देखा गया है, वह दो मंजिला होगा। पहली मंजिल की ऊंचाई 18 फीट और दूसरी मंजिल की ऊंचाई 15 फीट नौ इंच होगी। पिछले 28 सालों से राजस्थान, गुजरात, मिर्जापुर और देश के अन्य हिस्सों से आए कारीगर कार्यशाला में करीब एक लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का कार्य पूर्ण कर चुके हैं। विहिप के प्रस्तावित मंदिर मॉडल के भूतल के पत्थरों को तराशने का कार्य हो चुका है। रामजन्मभूमि के पार्श्व में प्रवाहित उत्तरावाहिनी मां सरयू, आग्नेय कोण पर विराजमान हनुमानजी, अयोध्यावासी और रामभक्त अब जल्द अपने रामलला को ऐसे भव्य राममंदिर में विराजमान होते देखेंगे, जिसकी कामना पिछली पांच सदी से होती रही है।

28 साल पहले बना अस्थाई मंदिर

रामजन्मभूमि पर मौजूदा अस्थाई मंदिर की नींव छह दिसंबर 1992 को उस वक्त पड़ी थी, जब कारसेवकों ने विवादित ढांचे को ढहा दिया था। इससे पहले साल 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने विवादित स्थल का ताला खोलने और उस जगह पर विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया था। साल 1986 में एक फरवरी को जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को राम पूजा की इजाजत दे दी थी। इसके बाद विवादित इमारत का ताला दोबारा खोला गया था। साल 1992 में छह दिसंबर को कारसेवकों ने अयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया था। ढांचा ढहने के बाद उस जगह पर 80 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा व करीब 16 फीट ऊंचा अस्थाई मंदिर बनाया गया था। साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का आदेश जारी किया था। तभी से लेकर अब तक रामजन्मभूमि पर रामलला का पूजन-अर्चन होता आ रहा है।

तीन माह में बना था नक्शा

जमीन का नाप आदि लेने के बाद रामजन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर का नक्शा तैयार करने में तीन महीने का समय लगा था। चंद्रकांत सोमपुरा बताते हैं कि तीन महीने तक रोजाना थोड़ा-थोड़ा समय निकालकर नक्शा तैयार किया गया था। इसके बाद यह नक्शा अशोक सिंहल को सौंपा गया था। उसके बाद विहिप के शीर्ष नेताओं, संतों और अखाड़ों के प्रमुखों को यह नक्शा दिखाया गया। फिर तय हुआ कि इसी नक्शे के अनुसार मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

1989 में बना था मंदिर का मॉडल

प्रस्तावित राममंदिर का मॉडल सबसे पहले साल 1989 में प्रयागराज कुंभ में रखा गया था। इसको चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया था। कुंभ के बाद इसे कुछ दिनों तक मंदिर के शिलान्यास स्थल पर रखा गया था। साल 1990 में जब श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला बनी तब मंदिर के मॉडल को भी उस जगह पर स्थापित किया गया था। कार्यशाला आने वाले श्रद्धालु मंदिर मॉडल के सामने शीश नवाना नहीं भूलते हैं।

साल 1990 में बनी कार्यशाला

विहिप की रामघाट स्थित रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला की स्थापना साल 1990 के सितंबर महीने में की गई थी। कार्यशाला के लिए मंदिर आंदोलन के महापुरुष परमहंस रामचंद्रदास ने जमीन दान में दी थी। कार्यशाला में प्रस्तावित मंदिर के मॉडल के साथ पूजन की गई शिलाएं और तराशी गईं शिलाएं भी रखीं गई हैं।

दो से ढाई वर्ष में तैयार होगा मंदिर

यदि मंदिर की तैयारियों पर गौर करें निर्धारित स्थल पर पहले तल के तराशे गए पत्थरों को स्थानानंतरित करने में अधिक से अधिक छह माह का समय लगेगा। इसके बाद दो से ढाई साल में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। पत्थरों को कॉपर और सफेद सीमेंट से जोड़ा जाएगा। पहले तल के पत्थरों की शिफ्टिंग के साथ ही गर्भगृह भी आकार लेगा, जहां रामलला की प्राण- प्रतिष्ठा होगी।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी कार्यशाला

मंदिर-मस्जिद विवाद के बाद अस्तित्व में आई श्रीरामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला श्रद्धालुओं की आस्था का भी केंद्र भी बनी हुई है। इसी कार्यशाला में पूजन की गई शिलाएं भी रखी गईं हैं। इसी कार्यशाला को तीर्थ के समान मान रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यशाला में रखे मंदिर के मॉडल व शिलाओं का दर्शन करने भी पहुंचते रहे।

इन लोगों ने की थी स्थापना

परमहंस के साथ मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग अशोक सिंहल, आचार्य गिरिराज किशोर, महंत नृत्यगोपाल दास, संघ विचारक मोरोपंत पिंगले आदि ने कार्यशाला की आधारशिला रखी थी।

लंबाई : रामजन्मभूमि पर राममंदिर बनाने के लिए विहिप ने जो नक्शा बनाया है, उसके मुताबिक प्रस्तावित मंदिर 268 फीट लंबा है।

चौड़ाई : राममंदिर की चौड़ाई करीब 140 फीट है।

ऊंचाई : राममंदिर की ऊंचाई 128 फीट है।

8 फीट ऊंची पीठिका : मंदिर की प्रथम पीठिका यानी चबूतरा आठ फीट ऊंचा होगा। इन तक सीढ़ियों से पहुंचा जा सकेगा। इसी पीठिका पर मंदिर का 10 फीट चौड़ा परिक्रमा मार्ग होगा। चार फीट नौ इंच ऊंची एक आधार पीठिका पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

पांच प्रखंड होंगे : अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप और गर्भगृह के रूप में मंदिर के पांच प्रखंड होंगे।

212 स्तंभ लगेंगे : मंदिर में 212 स्तंभ स्थापित होंगे। पहली मंजिल में 106 और इतने ही दूसरी मंजिल पर लगेंगे। पहली मंजिल पर लगने वाले स्तंभों की ऊंचाई 16 फीट छह इंच और दूसरी मंजिल पर लगने वाले स्तंभों की ऊंचाई 14 फीट छह इंच होगी।

हर स्तंभ पर होगी यक्ष-यक्षिणियां : प्रत्येक स्तंभ पर यक्ष-यक्षिणियों की 16 मूर्तियां और अन्य कलाकृतियां उकेरी जाएगी। इनका व्यास चार से पांच फीट तक रहेगा।

गर्भगृह : मंदिर के जिस कक्ष में रामलला विराजमान होंगे, उस गर्भगृह से ठीक ऊपर 16 फीट तीन इंच का विशेष प्रकोष्ठ होगा। इसी प्रकोष्ठ पर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिखर का निर्माण किया जाएगा। प्रस्तावित मंदिर में एक लाख 75 हजार घन फीट लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा।

Posted By: Yogendra Sharma