जिंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे, बारिशों में पतंगें उड़ाया करो।

चांद-सूरज कहां, अपनी मंजिल कहां, ऐसे-वैसों को मुंह मत लगाया करो।

- राहत इंदौरी

मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी का आज निधन हो गया। वे अपने पीछे काव्‍य जगत की बहुत यादें छोड़ गए हैं। एक बार साक्षात्‍कार में उन्‍होंने स्‍कूली बच्‍चों की परीक्षा, इससे जुड़े तनाव और पास होने के प्रेशर पर अपने विचार व्‍यक्‍त किए थे। उन्‍होंने कहा था कि मुझे दसवीं में कितने नंबर आए यह तो याद नहीं लेकिन मैं जीवन में एक सफल इंसान बना हूं। बच्चों को मेरा मशवरा है कि 10वीं, 12वीं क्लास के मार्क्स को उतनी ही अहमियत दें, जितनी जरूरी है। क्योंकि ये इम्तहान जिंदगी के बड़े कैनवास पर बहुत ही छोटे-छोटे से मकाम भर हैं। इन्हें मंजिल मानकर टेंशन पाल लेने की गलती हर्गिज न करें। 10वीं क्लास का इम्तहान दिए मुझे तीन दशक से ज्यादा का लंबा अरसा गुजर गया है। अब तो ठीक से याद भी नहीं है कि तब कितने नंबर मिले थे। मगर इतना यकीनी तौर पर कह सकता हूं कि वो नंबर आजकल के ज्यादातर बच्चों को मिलने वाले नंबरों के मुकाबले तो कम ही थे,लेकिन उन कम नंबरों के बावजूद मुझे जिंदगी में कामयाबी हासिल करने में कोई दिक्कत नहीं आई। इसलिए हर हाल में खुश रहें और अलग पायदान पर कामयाबी के लिए बेहतर तैयारी अभी से शुरू कर दें।

असफलता से घबराएं नहीं, इससे भी सीख लें

मैं ये नहीं कह रहा हूं कि स्कूली परीक्षाओं के लिए मेहनत न करें। खूब मेहनत करके पढ़ाई करें, क्योंकि कहीं न कहीं इससे आपकी तालीम की बुनियाद मजबूत होती है, लेकिन अगर किसी वजह से मार्क्स कम आए हैं तो उसे लेकर बेजा फिक्र न करें। जिंदगी आपको एक से बढ़कर एक मौके देगी। कभी आप कामयाब होंगे तो कभी नाकामयाब। मगर नाकामयाबी भी आपको कुछ न कुछ ऐसी सीख जरूर दे जाएगी, जो ताउम्र आपके काम आएगी। इसलिए पूरी ईमानदारी से मेहनत करें और फिर जो भी हालात बनें, उनका पुरसुकून अंदाज में ठंडे दिमाग से मुकाबला करें।

जो कसर रह गई, उसे आगे पूरी करें

रिजल्ट देखकर अपने बारे में बच्चों को ये फैसला खुद ही करना होगा कि उन्होंने सफलता की कोशिशों में कोई कसर तो नहीं छोड़ी। अगर कोई कसर छोड़ी है तो अगली बार उसका खास खयाल रखें। आपके पास वक्त की कोई कमी नहीं है, क्योंकि बचपन और किशोरावस्था, ये जिंदगी की दो ऐसी अवस्थाएं होती हैं, जहां आपको परिवार के लिए कमाना नहीं पड़ता है। मतलब, आपका परिवार आर्थिक रूप से आप पर निर्भर नहीं होता है। इसलिए बेशक कुछ वक्त ज्यादा लग जाए, लेकिन अपने आपको पूरी तरह तैयार करने के बाद ही आप आगे के संघर्ष के लिए निकलें। डिग्रियां या सर्टिफिकेट केवल दीवारों पर सजाने के लिए नहीं होतीं। इनसे जिंदगी को नई दिशा मिलती है। मगर जिंदगी इन्हीं के इर्द-गिर्द ही सीमित नहीं होती है।

Posted By: Navodit Saktawat

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