Shiromani Akali Dal Quits NDA: (इंद्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़)। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का 24 साल पुराना गठबंधन टूट गया। भाजपा के इस सबसे पुराने साथी ने शनिवार को कोर कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला लिया। भाजपा की एक अन्य पुरानी सहयोगी शिवसेना पहले ही साथ छोड़ चुकी है। अकाली दल और भाजपा के रिश्ते इतने सौहार्दपूर्ण थे कि दोनों पार्टियों ने मिलकर तीन बार पंजाब में सरकार बनाई और हर बार पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। दोनों दलों के रिश्तों को राजनीतिक से ज्यादा सामाजिक सौहार्द के रूप में देखा जाता रहा है।

केंद्र में सत्तारूढ़ राजग का गठन 1998 में हुआ था और शरद यादव इसके पहले संयोजक बनाए गए थे। शिअद इसका संस्थापक सदस्य है। गठबंधन टूटने की बुनियाद उसी दिन पड़ गई थी जब अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कृषि विधेयकों का विरोध करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से हरसिमरत कौर बादल को इस्तीफा देने के लिए कह दिया। हरसिमरत के इस्तीफा देने के बाद अकाली दल पर लगातार भाजपा और राजग से अलग होने का दबाव बना हुआ था। शनिवार करीब साढ़े तीन घंटे तक चली अकाली दल की कोर कमेटी में यह फैसला ले लिया।

धक्केशाही से अपने फैसले लागू कर रहा गठबंधन : बादल

बैठक के बाद सुखबीर सिंह बादल ने पत्रकारों से कहा, 'एनडीए सरकार ने कृषि विधेयक लाकर किसानों को मारने का फैसला लिया है। जिस धक्केशाही से केंद्र सरकार ने पहले लोकसभा और बाद में राज्यसभा में इसे पारित कराया, वह सभी ने देखा है। इसलिए हमने केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर होने का फैसला लिया। उस समय मैंने कहा था कि आगे की रणनीति तय करने के लिए हम जनता के पास जाएंगे। कई दिनों तक कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत करने के बाद फैसला किया गया कि ऐसे गठबंधन का हिस्सा नहीं बना जा सकता जो धक्केशाही के साथ अपने फैसले लागू कर रहा है।'

उन्होंने कहा कि कृषि विधेयक ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर में पंजाबी को दूसरी भाषा का दर्जा देने की अकाली दल की मांग भी नहीं मानी गई। जम्मू में पंजाबी बोलने वाले बहुत से लोग हैं। नेशनल कान्फ्रेंस के नेता फारूख अब्दुला ने भी इसका समर्थन किया। इसके बावजूद सरकार ने जम्मू कश्मीर की राज भाषाओं में अंग्रेजी को शामिल कर लिया, लेकिन पंजाबी को बाहर कर दिया। ऐसे में अब हमारे पास राजग से अलग होने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।

केंद्र सरकार पर नहीं पड़ेगा असर :

लोकसभा की कुल सदस्य संख्या वर्तमान में 540 है। तीन चुनाव क्षेत्र रिक्त हैं। सदन की संख्या में दो सदस्यों की भागीदारी के साथ शिरोमणि अकाली दल की सदन में हिस्सेदारी महज 0.37 फीसद है। इसका केंद्र सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

Posted By: Kiran K Waikar

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