CAA Petitions: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लगी 140 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच इन याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। बेंच में जस्टिस एस अब्दुल नजीर और संजीव खन्ना भी हैं। बता दें कि बेंच ने केंद्र को इन याचिकाओं को लेकर नोटिस जारी किया था। सामने आ रही जानकारी के मुताबिक सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने नई 84 याचिकाओं को लेकर जवाब देने के लिए कोर्ट से 6 हफ्ते का वक्त मांगा है। सरकार का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार को नई याचिकाओं पर जवाब देने के लिए 4 हफ्ते का समय तय किया है।

याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अब 144 याचिकाओं तक ही सुप्रीम कोर्ट सीमित रहेगा। इस मामले से जुड़ी कोई भी नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं कपिल सिब्बल ने कहा कि CAA को रद्द किया जाए, अगर ऐसा नहीं हो सकता है तो इसे दो महीने के लिए निलंबित किया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस कानून को रद्द नहीं कर सकते हैं। निलंंबित करने को भी रोक लगाना माना जाएगा। ऐसा हम नहीं कर सकते हैं।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिकाएं भी इनमें शामिल हैं। मुस्लिम लीग ने अपनी याचिका में कहा है कि CAA समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। यह शरणार्थियों के एक वर्ग को नागरिकता देता है, जबकि धर्म के नाम पर कुछ लोगों को नागरिकता देने से वंचित करता है। इसने CAA पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है।

इस याचिका में कहा गया है कि CAA भारतीय संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर को नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 को मंजूरी दी थी, जिसके बाद यह कानून के रुप में तब्दील हो गया था।

CAA पर हो रही जमकर राजनीति

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई राज्यों में राजनीति चरम पर पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में विपक्ष इस कानून को लेकर जमकर हंगामा मचा रहा है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि कानून का चाहे कितना भी विरोध हो इसे वापस नहीं लिया जाएगा।

यह कहता है CAA

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नागरिकता कानून के मुताबिक तीन मुस्लिम देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए गए गैरमुस्लिमों को देश की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। इन तीन देशों के मु्स्लिमों को इस कानून में शामिल नहीं किया गया है। इसे लेकर ही पूरी सियासत हो रही है।

Posted By: Neeraj Vyas

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