नई दिल्ली। अफगानिस्तान में शांति समझौता ठोस रूप लेता जा रहा है और वहां के शासन में तालिबानियों की भागीदारी सुनिश्चित होना लगभग तय है ऐसे समय संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों के नेटवर्क पर एक ऐसी रिपोर्ट दी है जो भारत के लिए काफी चिता का विषय बन सकती है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी अफगानिस्तान सिर्फ अलकायदा ही नहीं बल्कि जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे भारत विरोधी संगठनों काअड्डा बना हुआ है। इन दोनों संगठनों के सैकड़ों आतंकियों के अलावा वहां पर तकरीबन 6,500 पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकी सक्रिय हैं जो अफगानिस्तान के लिए घातक साबित हो सकते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है, यह रिपोर्ट उसके इस मत को सही साबित करती है कि पाकिस्तान ही इस क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। वहां अभी भी आतंकियों को हर तरह की शरण मिलती है और उन्हें प्रशिक्षण बी दिया जाता है।

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब भारत भी अफगान शांति वार्ता को लेकर अपनी नीति में कुछ बदलाव करने को लेकर विचार कर रहा है। अफगानिस्तान शांति वार्ता में भारत की वैसी भागीदारी नहीं है जैसी कि पाकिस्तान की है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि आधिकारिक तौर पर भारत अभी भी तालिबान को मान्यता नहीं देता है। अमेरिका भी भारत को यही सलाह दे रहा है कि वह तालिबान के साथ बातचीत की पहल करे। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि तालिबान के आने का बाद अफगानिस्तान में भारत विरोधी आतंकी संगठन और ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं। आशंका इस बात की भी है कि पाकिस्तान तालिबान के शासन में कश्मीर में आतंक फैलाने वाले जैश और लश्कर जैसे संगठनों को और ज्यादा बढ़ावा दे सकता है। पहले भी पाकिस्तान ऐसा कर चुका है। यही कारण है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र की अफगानिस्तान पर जारी तकनीकी रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि हमने संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में जारी इस रिपोर्ट को काफी गंभीरता से लिया है जिसके अनुसार अफगानिस्तान में अभी भी यूएन की तरफ से आतंकी संगठन घोषित अलकायदा और इसके सहयोगी दूसरे आतंकी संगठन सक्रिय हैं। यह भी पता चला है कि वहां यूएन की तरफ से आतंकी घोषित दूसरे संगठन जैश और लश्कर आतंकियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और दूसरी अवैध गतिविधियों में सक्रिय हैं। इससे हमारा यह मत सत्य होता है कि पाकिस्तान वैश्विक आतंक का केंद्र बना हुआ है। पाकिस्तान सरकार एक राजकीय नीति के तहत आतंकियों को प्रशिक्षित करती है, उन्हें शरण देती है और उन्हें धन और हथियार मुहैया कराती है। ये इस इलाके में और दुनिया के दूसरे हिस्सों में आतंक को बढ़ावा देते हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किए गए वादे पूरा नहीं कर रहा है और यह एफएटीएफ की शर्तों का भी सरासर उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसका संज्ञान लेकर पाकिस्तान को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसे आतंकी गतिविधियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई के लिए बाध्य करना चाहिए।

गौरतलब है कि लश्कर-ए-तैयबा लाहौर में रहने वाले आतंकी हाफिज सईद का संगठन है जबकि जैश-ए-मुहम्मद का सरगना मसूद अजहर है। दोनों को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी घोषित किया हुआ है। दोनों के ऊपर भारत में सीधे तौर पर कई आतंकी हमले करवाने के आरोप हैं। दोनों पर पाकिस्तान दिखावे के लिए कई बार कार्रवाई करता है, लेकिन बाद में उन्को छोड़ दिया जाता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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