पटना। अलबर्ट आइंस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देने वाले और भारत के स्टीफन हॉकिंग कहे जाने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठनारायण सिंह का आज निधन हो गया। वशिष्ठनारायण सिंह ने पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। दुनियाभर में गणित के जरिए भारत को विशेष पहचान दिलाने वाले वशिष्ठनारायण सिंह को निधन के बाद भी सरकारी उपेक्षा का शिकार होना पड़ा। उनके निधन के बाद अस्पताल ने उनके शव को घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं करवाई। वशिष्ठनारायण सिंह के शव को स्ट्रेचर पर लेकर करीब डेढ़ घंटे तक उनके भाई ब्लड बैंक के बाहर खड़े रहे।

लोगों को जब सरकारी उदासीनता का पता चला तो सोशल मीडिया पर उनके निधन पर दुख जताते हुए सरकारी उपेक्षा पर जमकर नाराजगी का इजहार किया। लोगों ने कहा कि इतनी बड़ी हस्ती की ऐसी उपेक्षा? कुमार विश्वास ने लिखा है कि उफ़्फ़, इतनी विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा? विश्व जिसकी मेधा का लोहा माना उसके प्रति उसी का बिहार इतना पत्थर हो गया? आप सबसे सवाल बनता हैं ! भारतमाँ क्यूँ सौंपे ऐसे मेधावी बेटे इस देश को जब हम उन्हें सम्भाल ही न सकें?

एक अन्य यूजर ब्रजेश कुमार सिंह ने लिखा है कि ये पीएमसीएच कैंपस में महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर है, जिनके परिजनों को एम्बुलेंस तक मुहैया कराने की औपचारिकता अस्पताल प्रशासन ने नहीं निभाई। शर्मनाक है ये! जिस आदमी की उपलब्धियों पर बिहार समेत देश गर्व करता है, अंत में भी उसके साथ ऐसा व्यवहार?

जब देशभर में इस बात को लेकर बिहार के सरकारी ढर्रे पर सवाल उठाए गए और सरकार की आलोचना की गई तो केंद्रीय मंत्री गिरिराजसिंह ने मोर्चा संभाला और वशिष्ठनारायण सिंह के राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की बात कही। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक जताते हुए उन्होंने दुनियाभर में भारत का रोशन किया। वशिष्ठनारायण सिंह के निधन से देश और बिहार को अपूरणीय क्षति हुई है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

Posted By: Yogendra Sharma