कानपुर। कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे मार गिराया गया है। अपनी जान बचाने के लिए वह उज्जैन के महाकाल मंदिर में पहुंचा था और वहां मंदिर के सुरक्षाकर्मियों को शक होने पर उसे गिरफ्तार कर लिया था। उसे लगता था कि महाकाल की शरण में जाने से वह अकाल मृत्यु से बच जाएगा, लेकिन आज साफ हो गया है कि महाकाल भी अपराधियों को आशीर्वाद नहीं देते हैं।

वहां से ट्रांजिट रिमांड पर विकास दुबे को कानपुर लाया जा रहा था। पनकी पहुंचने तक के करीब 10 घंटे के सफर में शांत रहा। मगर, कानपुर पहुंचते ही विकास दुबे को लगा कि एक बार फिर वह पुलिस को अपनी दबंगई से दबा सकता है। इस दौरान उसने पुलिस से पिस्टल छीनने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इस वजह से हुई हाथा-पाई में एसटीएफ की कार पलट गई और मौके का फायदा उठाकर विकास दुबे पिस्टल लेकर भागने लगा।

गाड़ी में मौजूद एसटीएफ के दो कर्मचारी भी घायल हुए हैं। घायलों को हैलेट अस्पताल पहुंचाया गया है। इसके अलावा उसने पुलिस पर फायरिंग करनी शुरू कर दी जवाबी फायरिंग में वह घायल हो गया था और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं, जिनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। इससे पहले गुरुवार को दुबे का साथ प्रभात भी इसी तरह भागने की कोशिश के दौरान मारा गया था। दुबे कई और साथी भी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

जानिए अब तक क्या हुआ

दो-तीन जुलाई की दरमियानी रात को जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में दबिश देने के लिए पुलिस विकास के गांव बिकरू में पहुंची थी। इस दौरान चौबेपुर के इंस्पेक्टर विनय तिवारी और दो अन्य कॉन्सटेबलों ने विकास दुबे को दबिश के बारे में जानकारी दे दी थी। इस मामले में उन्हें निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया है। उधर, विकास वहां से भागने की बजाय पुलिस को ही सबक सिखाने की सोचकर मोर्चा लेने के लिए बैठ गया। उसने हथियारबंद अपने साथियों को भी बुला लिया था।

रात को जब पुलिसटीम मौके पर पहुंची, तो घर तक आने से रोकने के लिए विकास दुबे ने रास्ते में जेसीबी लगवा दी थी। लिहाजा, पुलिस टीम को कार से उतरकर उसके घर की तरफ पैदल चलना पड़ा। तब विकास दुबे और उसके साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें डीएसपी देवेंद्र सिंह सहित आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। वहीं, सात अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस की लाशों को जलाना चाहता था

पुलिस से पूछताछ में विकास दुबे ने बताया था कि वह मारे गए पुलिसकर्मियों की लाशों को जलाना चाहता था। लिहाजा, सारे पुलिसकर्मियों की लाशों को एक जगह पर इकठ्ठा किया गया था और डीजल डालकर उन्हें आग लगाने की तैयारी थी। मगर, तब तक दूसरी पुलिस टीम के पहुंचने की वजह से वह अपनी खूंखार और बर्बर सोच को अंजाम नहीं दे पाया।

उधर, डीएसपी देवेंद्र मिश्रा के शव के साथ ही सबसे ज्यादा बर्बरता की गई थी। दरअसल, वह कई बार विकास दुबे को देख-लेने की बात कह चुके थे। साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर नहीं सुधरा, तो जैसे एक टांग खराब है, दूसरी भी वैसी ही कर दूंगा। इसी खुन्नस को निकालने के लिए विकास दुबे और उसके साथियों ने देवेंद्र मिश्रा के पैर पर कुल्हाड़ी से वार किया था।

सात दिन भागता रहा

वारदात के बाद तीन जुलाई को उसके मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और चचेरे भाई अतुल को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। दो दिनों तक वह अपने गांव से महज छह किमी दूर शिवली में छिपा रहा। यहां से वह अपने गुर्गों को अलग-अलग दिशाओं में भागने की सलाह देता है। पांच जुलाई को उसके गुर्गे दयाशंकर अग्निहोत्री को कल्याणपुर में मुठभेड़ के बाद पकड़ा जाता है, जो पुलिस को कई राज बताता है।

शिवली से विकास के साथ ही उसका दाहिना हाथ और भतीजा अमर दुबे हमीरपुर की तरफ भाग गया। 50 हजार रुपए का इनामी बदमाश अगले दिन 8 जुलाई को हमीरपुर के मौदहा में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। विकास शिवली से भागकर फरीदाबाद पहुंचा। वहां जिन तीन लोगों ने उसकी मदद की, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

इनमें से एक प्रभात मिश्रा को ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया जा रहा था, जहां पनकी के पास उसने पुलिस की बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की। इस दौरान नौ जुलाई को उसे भी मुठभेड़ में मार गिराया गया। वहीं, इटावा में पुलिस ने बउवा शुक्ला को भी मार गिराया, जो कानपुर में पुलिस पर हमला करने वाली रात को विकास के घर पर मौजूद था। उज्जैन में विकास ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताया था कि डीएसपी देवेंद्र के पैर पर कुल्हाड़ी भी उसी ने मारी थी।

बहरहाल, इस दौरान विकास दुबे की लोकेशन फरीदाबाद और नोएडा में मिलने के बाद वह वहां से भाग निकला। बताया जा रहा है लखनऊ के दो वकीलों की सलाह पर वह नौ जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर में आत्मसमर्पण के लिए पहुंचा था। यहां क्षिप्रा नदी में स्नान करने के बाद उसने महाकाल के दर्शन किए।

उज्‍जैन में हुआ था गिरफ्तार

विकास दुबे को उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था। महाकाल मंदिर परिसर में पहुंच कर यह शख्स चिल्लाने लगा कि मैं विकास दुबे हूं। उसे मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षा गार्ड ने पकड़ लिया और पुलिस को इसकी सूचना दी थी। इसके बाद महाकाल थाना पुलिस उसे गाड़ी मे बैठाकर कंट्रोल रूम की तरफ रवाना हो गई। पुलिस ने जब उसे पकड़ा, तो वह चिल्‍लाने लगा- मैं विकास दुबे हूं... कानपुर वाला।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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