नारायण कृष्‍णमूर्ति। यह समय वित्त वर्ष 2013-14 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का है। आप यह काम सीए के पास जाकर भी करवा सकते हैं और खुद भी आईटी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसकी आखिरी तारीख 30 जून होती है, लेकिन पिछले कुछ सालों से हर बार इसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया जाता है। आईटी रिटर्न दाखिल करने का काम थोड़ा जटिल है और चरणबद्ध रूप से यानी एक कदम के बाद दूसरे कदम के रूप में पूरा होता है। यह काम घर बैठे ई-फाइलिंग के जरिए यानी ऑनलाइन भी किया जा सकता है।

यदि फाइलिंग के चरणों का सही से ध्यान रखें, तो आप आईटी रिटर्न खुद ही आसानी से दाखिल कर सकते हैं। हम आपको बताते हैं आईटी रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया कैसे पूरी करें, खास तौर पर ई-फाइलिंग को।

पहला कदम

सभी दस्तावेज और जानकारियां एक जगह इकट्ठा करें

यह वह चरण है, जहां आपको सबसे ज्यादा मेहनत करनी होती है। आपको यह तय करना होता है कि सभी तरह की आमदनी की जानकारी एक जगह एकत्र करें। साथ ही कानूनी रूप से टैक्स छूट मिलने वाली जगहों की भी पहचान करें, ताकि कोई क्लेम छूट नाजाए। इसके लिए आपको जो दस्तावेज जुटाने हैं, वे हैं:

  1. बैंक अकाउंट्‌स के स्टेटमेंट लगेंगे।
  2. अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो फॉर्म 16 जुटाना होगा।
  3. अगर आपको बैंक की एफडी वगैरह से ब्याज मिला है और बैंक ने उस पर टैक्स काटा है, तो फॉर्म 16ए लगेगा।
  4. यह ध्यान रखें कि अगर आपको पिछले वित्त वर्ष में एक से ज्यादा जरियों से आमदनी हुई है या एक से ज्यादा बैंकों से आपको ब्याज मिला है, तो आपको सभी से फॉर्म 16 और 16ए जुटाना होगा।
  5. यदि आपने कहीं दान दिया है, तो उसकी असली रसीद जरूरी होगी।
  6. समय पर दस्तावेज न मिलने के कारण फॉर्म 16 में जिक्र करने से बच गए निवेशों के दस्तावेज। आप इस तरह के निवेशों पर अब टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं।
  7. रिटर्न में ब्याज से होने वाली आमदनी दर्शाने के लिए एनएससी, रैकरिंग डिपॉजिट के निवेश प्रमाण पत्र।
  8. अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान शेयर बाजार में सौदा किया है या म्युचुअल फंड से फायदा प्राप्त किया है, तो कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट।
  9. असेसिंग ऑफीसर की जानकारी।

बैंक अकाउंट की जानकारी, जहां इनकम टैक्स विभाग आपके रिफंड (अगर कोई है) को जमा कर सके। इसमें अकाउंट नंबर,आईएफएससी कोड, अकाउंट का प्रकार आदि की जानकारी लगती है। यह जानकारी आप अपने चेक से भी ले सकते हैं। incometaxindiafilling.gov.in वेबसाइट से फॉर्म 26एएस।

दूसरा कदम

जिस जरिए से आमदनी जमा होती है, उन सभी का विश्लेषण करें

आपके बैंक खाते में जहां से भी आमदनी होती है, उन सभी का विश्लेषण करें। ऐसी आमदनी वेतन, पेंशन, डिविडेंड यानी लाभांश, ब्याज, किराए आदि किसी भी जरिए से हो सकती है, जिस पर टैक्स लगता हो। हालांकि अकाउंट में किसी तरह का रिफंड (टिकट कैंसिल करवाने, डबल डेबिट या बिल आदि), आंतरिक फंड ट्रांसफर (एक अकाउंट से दूसरे में ट्रांसफर) के रूप में आया पैसा टैक्स के दायरे में नहीं आएगा। इस विश्लेषण से आपको साफ तौर पर पता चल जाएगा कि कौन सी आमदनी और उसका जरिया टैक्स के दायरे में है और कौन सा नहीं?

आपके नियोक्ता द्वारा दिए गए फॉर्म 16 या बैंक द्वारा दिए गए फॉर्म 16ए में जो टैक्स काटा गया है, क्या वास्तव में इतना ही टैक्स देना है। यह जांचने के लिए आप इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर दिए गए फॉर्म 26एएस और आपके नियोक्ता/बैंक द्वारा दिए गए फॉर्म 16 या16ए में काटे गए टैक्स की तुलना कर सकते हैं। अगर दोनों फॉर्मों में कोई अंतर है, तो अपने नियोक्ता/बैंक के साथ संपर्क कर मामला सुलझाएं।

दान की रसीदों, एनएससी सर्टिफिकेट, कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट, निवेश के प्रमाण आदि को ध्यान से जांचना चाहिए। इसके बाद के चरण में आमदनी, डिडक्शन आदि को व्यवस्थित क्रम में रखें, ताकि इन्हें दर्ज करते समय आसानी हो।

तीसरा कदम

इनकम टैक्स ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाना और खुद को रजिस्टर करना

अब www.incometaxindiafilling.gov.in पर लॉग ऑन करें। यह इनकम टैक्स रिटर्न की ई-फाइलिंग के लिए एकमात्र वेबसाइट है। अगर आप नए यूजर हैं, तो आपको वेबसाइट पर खुद को रजिस्टर करना होगा। इसके लिए वेबसाइट पर रजिस्टर युअर सेल्फ सेक्शन में जाएं।

यहां इंडीविजुअल लिंक को चुनें और जरूरी जानकारियां (पैन नंबर, सरनेम, मध्य नाम, पहला नाम, जन्म तारीख, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर आदि) को दर्ज कराएं। वेबसाइट आपके पैन नंबर को आपका यूजर आईडी बनाती है।

खुद को रजिस्टर्ड कराने के बाद आप इस यूजर आईडी, पासवर्ड और अपनी जन्म तारीख के जरिए वेबसाइटपर कभी भी लॉग-इन कर सकते हैं।

चौथा कदम

सही इनकम टैक्स फॉर्म चुनना

लॉग-इन करने के बाद आपको आपकी आमदनी के अनुसार सही इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फॉर्म चुनना होगा। यहां आपको 1, 2, 3, 4 और 4एस फॉर्म मिलेंगे।

  • फॉर्म-1 वेतन से आमदनी, सिर्फ एक मकान से आमदनी, ब्याज और पेंशन समेत अन्य आमदनी वालों के लिए इस्तेमाल होगा।
  • फॉर्म-2 का इस्तेमाल वेतन, मकान से आमदनी, कैपिटल गेन्स और अन्य आमदनी के लिए होता है।
  • फॉर्म-3 किसी भागीदारी फर्म में हिस्सेदारी से आमदनी के लिए उपयोग में लाया जाता है।
  • फॉर्म-4 का इस्तेमाल मालिकाना हक वाले कारोबार के लिए होता है।
  • इसी तरह फॉर्म-4एस का इस्तेमाल धारा 44एई में वर्णित कारोबार, वेतन/पेंशन, एक मकान की आमदनी, अन्य जरियों से आमदनी के लिए किया जाता है।

मिसाल के तौर पर, यदि आप वेतनभोगी कर्मचारी हैं और आपको बैंक से ब्याज भी मिलता है, लेकिन इसके अलावा कोई और आमदनी नहीं है, तो आपके लिए आईटीआर फॉर्म-1 लागू होगा। एक बार यह तय करने के बाद कि आप पर कौन सा फॉर्म लागू होगा, फॉर्म को डाउनलोड कर लें और एक फोल्डरमें सेव करके रख लें।

पांचवां कदम

फॉर्म को पूरा भरना और एक्सएमएल अपलोड करना

अब आपको सभी जानकारियां सावधानीपूर्वक भरनी होंगी। जब आप दी गई शीट में सभी जानकारियां दे दें, तो 'वैलिडेट' टैब पर क्लिक कर पता लगाएं कि आपने सही तरीके से जानकारियां दी हैं या नहीं। अगर कोई त्रुटि या गलती होगी, तो आपको 'एरर बॉक्स' दिखेगा।

आपको तब तक गलतियों को दुरुस्त करना होगा, जब तक 'शीट इज ओके' का मैसेज नहीं आ जाता। इसके बाद आपको एक और शीट भरनी होगी। जब आप सारी शीटें भर चुकें और सभी को वैलिडेट कर चुकें, तो 'कैल्क्यूलेट टैक्स' टैब पर क्लिक करें। अगर इसके नतीजे में आपको टैक्स दिखाया जाता है, तो आपको वहां दी गई लिंक पर जाकर टैक्स का भुगतान करना होगा।

टैक्स चुकाने के बाद आपको 'टैक्स पेड एंड वैरिफिकेशन' शीट के 'सेल्फ-असेसमेंट टैक्स' सेक्शन में जाकर अपडेट करना होगा। अब आपको अपने डेटा की एक्सएमएल बनानी होगी। इसके लिए 'जेनरेट एक्सएमएल' पर क्लिक करें।

इससे एक एक्सएमएल फाइल बन जाएगी और यह अपने-आप फोल्डर में सेव हो जाएगी। अब आपको वेबसाइट के 'अपलोड रिटर्न' सेक्शन में जाना होगा और एक्सएमएल फाइल को अपलोड करना होगा।

छठा कदम

आईटीआर-वी डाउनलोड कर सीपीसी बेंगलुरू भेजना

जब आप एक्सएमएल फाइल को अपलोड कर देंगे, तो आपको प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने का संदेश दिखेगा और रसीद (अकनॉलेजमेंट) भी मिलेगा। इस अकनॉलेजमेंट को आईटीआर-वी कहा जाता है। यहां आपको जो काम करने होंगे, वे इस तरह हैं-

  1. आईटीआर-वी को डाउनलोड करना
  2. इसका प्रिंटआउट लेना और उसमें बताई गई जगह अपने हस्ताक्षर करना (सिर्फ काले पेन से)
  3. इसे सीपीसी, बेंगलुरू के पते पर साधारण डाक या स्पीड पोस्ट से भेजना। इसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न की ऑनलाइन फाइलिंग के बाद 120 दिन का समय मिलता है।

सातवां कदम

रिटर्न फाइल करने के बाद जांचें ये चीजें

जब आप एक्सएमएल को डाउनलोड कर लेते हैं और आईटीआर-वी को भेज देते हैं, इसके बाद भी कुछ काम बाकी रह जाते हैं। इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर 'सर्विसेज' सेक्शन में जाएं और इन चीजों को जांच लें-

  1. सीपीसी, बेंगलुरू में अपनी आईटीआर-वी की रसीद का स्टेटस
  2. रिफंड प्रक्रिया का स्टेटस
  3. संशोधित रिटर्न दाखिल करना (जरूरी होनेपर)
  4. रेक्टीफाइंग रिक्वेस्ट दाखिल करना
  5. रेक्टीफिकेशन रिक्वेस्ट का स्टेटस
  6. किसी खास असेसमेंट इयर के लिए आउटस्टैंडिंग एरियर/कोई और मांग की जानकारी

यहां आकर आपकी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया कदम-दर-कदम पूरी होती है। याद रखें, सिर्फ रिटर्न डाउनलोड करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी हार्ड कॉपी को सीपीसी, बेंगलुरू भेजना भी जरूरी है। अगर आप हार्ड कॉपी नहीं भेजते, तो यह समझा जाएगा कि आपने रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की।