पंकज मठपाल

एमडी, ऑप्टीमा मनी मैनेजर्स

टैक्स प्लानिंग बचत बढ़ाने का तरीका है। इसके तहत कानून के दायरे में टैक्स बचाने के तरकीबें अपनाई जाती हैं। इस लिहाज से इसे फाइनेंसियल प्लानिंग का हिस्सा माना जाता है। चूंकि 31 मार्च करीब है, लिहाजा यदि मौजूदा वित्त वर्ष से संबंधित कुछ काम बचे हों तो उन्हें समय रहते पूरा करना जरूरी है।

निवेश से बचेगा टैक्स

आयकर कानून के मुताबिक कुछ विशेष स्कीम्स, मसलन पब्लिक प्रोविडेंट फंड, एनएससी, पांच साल वाले बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट, टैक्स सेविंग म्यूच्युअल फंड, एनपीएस आदि में निवेश करने पर टैक्स में राहत मिल सकती है। आयकर की धारा 80सी के तहत निवेश की सीमा 1,50,000 रुपए है, जिसके तहत निवेश के अलावा बच्चों की स्कूल फीस और होम लोन के लिए मूलधन अदायगी भी शामिल है। इसके अलावा आयकर की धारा 80सी सी डी (1बी) के तहत नेशनल पेंशन स्कीम में 50,000 रुपए का निवेश करके अतिरिक्त टैक्स बचाया जा सकता है। ये निवेश वित्त वर्ष के दौरान कभी भी किया जा सकता है, लेकिन यदि आपने अभी तक ऐसा नहीं किया है, तो यह काम जल्द पूरा कर लें। यदि 31 मार्च की तारीख निकल गई तो मौजूदा वित्त वर्ष के लिए आपको इसका लाभ नहीं मिलेगा।

यदि वेतनभोगी हैं और अपने दफ्तर से मेडिकल खर्च पाने के हकदार हैं तो मेडिकल बिल नियोक्ता को देना न भूलें। यदि आप किराए के मकान में रह रहे हैं, तो किराए की रशीदें दफ्तर में जरूर जमा कराएं।

हेल्थ इंश्योरेंस पर छूट

यदि आप अपने और परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं तो आयकर की धारा 80डी के तहत 25,000 रुपए तक के प्रीमियम पर टैक्स में छूट पा सकते हैं। यदि आप आपने माता पिता की हेल्थ इन्सुरेंस पालिसी के लिए 25,000 रुपए तक का प्रीमियम भरते हैं तो उस पर आप को अलग से छूट मिलेगी। यदि आपके माता पिता की उम्र 60 वर्ष से अधिक है तो यह तय सीमा 30,000 रुपए है।

हेल्थ चेक-अप कराएं

यदि आप 31 मार्च से पहले हेल्थ चेक-अप करा लेते हैं तो इस पर 5,000 रुपए तक के खर्च पर इनकम टैक्स में छूट का लाभ उठा सकते हैं। यह खर्च धारा 80डी के तहत मिली छूट की सीमा के भीतर किया जा सकता है।

होम लोन के ब्याज पर छूट

होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। यदि जिस घर के लिए लोन लिया, उसमें खुद रह रहे हैं तो आप 2 लाख रुपए तक का ब्याज आमदनी में से घटाकर टैक्स में छूट पा सकते हैं, लेकिन यदि आपने वह घर किराए पर दे रखा है तो आप बिना किसी तय सीमा के पूरे ब्याज पर टैक्स में छूट पा सकते हैं। इसके लिए बैंक से प्रमाण पत्र लेकर दफ्तर में जमा करा दें।

न्यूनतम अनिवार्य निवेश

यदि आपने पीपीएपॅ या एनपीएस अकाउंट खोल रखा है तो आपको पता होगा की पीपीएपॅ इकाउंट में एक वित्त वर्ष के दौरान न्यूनतम 500 रुपए और एनपीएस में 6,000 रुपए निवेश करना होता है। ऐसा न करने पर जुर्माना अदा करना होगा। इसलिए यदि टैक्स प्लानिंग के नजरिए से निवेश की सीमा पूरी हो गई हो तो भी इन खातों में न्यूनतम रकम जमा करना न भूलें।

इनकम टैक्स रिटर्न

आयकर कानून के मुताबिक एक वित्त वर्ष के दौरान अर्जित आय का रिटर्न उस वित्तीय वर्ष की अंतिम तारीख से 2 साल के भीतर भरा जा सकता है। यानी वित्त वर्ष 2013-14, जिसकी देय तिथि 31 जुलाई 2014 थी, यदि वह अब तक नहीं भरा है तो वह 31 मार्च, 2016 तक भरा जा सकता है। उसके बाद वित्त वर्ष 2013-14 का रिटर्न भरना संभव नहीं होगा। इसके अलावा वित्त वर्ष 2014-15 जिसकी देय तिथि 31 जुलाई 2015 थी, यदि अब तक नहीं भरा गया है तो वह 31 मार्च 2016 तक बिना किसी जुर्माने के भरा जा सकता है। उसके बाद आयकर विभाग आपसे 5 हजार रुपए तक का जुर्माना वसूल सकता है। हालांकि 31 मार्च 2015 को खत्म वित्त वर्ष का रिटर्न 31 मार्च 2017 तक भरा जा सकता है। यदि किसी ने आयकर छुपाने के मकसद से रिटर्न फाइल नहीं किया है तो आयकर विभाग कानूनी कार्यवाही कर सकता है।

प्रोफेशनल टैक्स

वेतनभोगी कर्मचारियों का प्रोफेशनल टैक्स वेतन में से काट लिया जाता है। लेकिन, यदि आपका निजी व्यवसाय है या फिर आपको प्रोफेशनल फीस के रूप में आमदनी होती है तो आपको प्रोफेशनल टैक्स खुद चुकाना होगा। इसकी अंतिम तारीख भी 31 मार्च है।