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अपने अजब-गजब प्रसाद के चलते प्रसिद्ध हैं ये मंदिर, देखिए स्पेशल फोटो-गैलरी

9 photos    |  Published Mon, 26 Feb 2018 06:27 PM (IST)
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सभी मंदिरों में कोई न कोई वस्तु प्रसाद के रूप में भक्तों को दी जाती है। लेकिन, इन मंदिरों में मिलने वाले प्रसाद के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे।
सभी मंदिरों में कोई न कोई वस्तु प्रसाद के रूप में भक्तों को दी जाती है। लेकिन, इन मंदिरों में मिलने वाले प्रसाद के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

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बालासुब्रमणियम मंदिर, केरल - बालामुरुगन भगवान को समर्पित इस मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में चॉकलेट दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान के बाल स्वरुप को चॉकलेट अत्यंत प्रिय है।
बालासुब्रमणियम मंदिर, केरल - बालामुरुगन भगवान को समर्पित इस मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में चॉकलेट दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान के बाल स्वरुप को चॉकलेट अत्यंत प्रिय है।

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चूहों वाली माता, बीकानेर - राजस्थान के बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर चूहों वाली माता का मंदिर है। इस मंदिर में आनेवाले भक्तों को चूहों का जूठा प्रसाद मिलता है। फिर भी इसे खाने वाला कोई भक्त आजतक बीमार नहीं पड़ा है।
चूहों वाली माता, बीकानेर - राजस्थान के बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर चूहों वाली माता का मंदिर है। इस मंदिर में आनेवाले भक्तों को चूहों का जूठा प्रसाद मिलता है। फिर भी इसे खाने वाला कोई भक्त आजतक बीमार नहीं पड़ा है।

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महादेव मंदिर, त्रिशूर - भारत में केरल ऐसा राज्य है, जहां साक्षरता की दर सबसे ज्यादा है। यहीं के एक मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में कोई फल, अनाज या मिष्ठान न देकर कुछ और ही दिया जाता है। जी हां, इस मंदिर में भक्तों को सीडी, डीवीडी, किताबें इत्यादि का वितरण प्रसाद के रूप में किया जाता है।
महादेव मंदिर, त्रिशूर - भारत में केरल ऐसा राज्य है, जहां साक्षरता की दर सबसे ज्यादा है। यहीं के एक मंदिर में भक्तों को प्रसाद के रूप में कोई फल, अनाज या मिष्ठान न देकर कुछ और ही दिया जाता है। जी हां, इस मंदिर में भक्तों को सीडी, डीवीडी, किताबें इत्यादि का वितरण प्रसाद के रूप में किया जाता है।

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जगन्नाथ मंदिर, ओडिशा - ओडिशा के पुरी स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगता है। बाद में यह प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित भी किया जाता है। इसी मंदिर में हर साल विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर, ओडिशा - ओडिशा के पुरी स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगता है। बाद में यह प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित भी किया जाता है। इसी मंदिर में हर साल विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।

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चाइनीज काली मंदिर, पश्चिम बंगाल - कोलकाता में बने इस मंदिर को चाइनीज कम्युनिटी ने बनवाया है। इस मंदिर में माता को प्रसाद के रूप में नूडल्स का भोग लगाया जाता है, जो बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित को किए जाते हैं।
चाइनीज काली मंदिर, पश्चिम बंगाल - कोलकाता में बने इस मंदिर को चाइनीज कम्युनिटी ने बनवाया है। इस मंदिर में माता को प्रसाद के रूप में नूडल्स का भोग लगाया जाता है, जो बाद में भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित को किए जाते हैं।

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अलागार मंदिर, तमिलनाडु - मदुरै में बने इस मंदिर में भगवान विष्णु के अलागार रूप को डोसा चढ़ाकर उसका वितरण भक्तों में किया जाता है।
अलागार मंदिर, तमिलनाडु - मदुरै में बने इस मंदिर में भगवान विष्णु के अलागार रूप को डोसा चढ़ाकर उसका वितरण भक्तों में किया जाता है।

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काल भैरव मंदिर, मध्य प्रदेश - उज्जैन के सेनापति के रूप में विद्यमान काल भैरव को प्रसाद के रूप में शराब का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद बचे हुए भाग को प्रसाद के तौर पर भक्तों में बांटा जाता है।
काल भैरव मंदिर, मध्य प्रदेश - उज्जैन के सेनापति के रूप में विद्यमान काल भैरव को प्रसाद के रूप में शराब का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद बचे हुए भाग को प्रसाद के तौर पर भक्तों में बांटा जाता है।

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कामाख्या देवी मंदिर, असम - गुवाहाटी स्थित इस मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। मां के 51 शक्तिपीठों में से एक यह पीठ तंत्र साधना के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है। यहां प्रसाद के रूप में भक्तों को गीला कपड़ा दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह कपड़ा माता के रज से गीला होता है।
कामाख्या देवी मंदिर, असम - गुवाहाटी स्थित इस मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। मां के 51 शक्तिपीठों में से एक यह पीठ तंत्र साधना के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है। यहां प्रसाद के रूप में भक्तों को गीला कपड़ा दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह कपड़ा माता के रज से गीला होता है।

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