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Maha Shivratri 2022: शिवलिंग के हैं कई और नाम, यह जानना है पुण्य का काम

5 photos    |  Published Mon, 03 Jul 2017 11:22 AM (IST)
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यानी शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है।
यानी शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है।

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स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। धरती उसकी पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।
स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। धरती उसकी पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है।

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वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनन्त ब्रह्माण्ड (ब्रह्माण्ड गतिमान है) की धुरी ही लिंग है।
वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनन्त ब्रह्माण्ड (ब्रह्माण्ड गतिमान है) की धुरी ही लिंग है।

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पुराणों में शिवलिंग को कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है जैसे प्रकाश स्तंभ लिंग, अग्नि स्तंभ लिंग, उर्जा स्तंभ लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ लिंग आदि।
पुराणों में शिवलिंग को कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है जैसे प्रकाश स्तंभ लिंग, अग्नि स्तंभ लिंग, उर्जा स्तंभ लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ लिंग आदि।

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लेकिन बौद्धकाल में धर्म और धर्मग्रंथों के बिगाड़ के चलते लिंग को गलत अर्थों में लिया जाने लगा जो कि आज तक प्रचलन में है।
लेकिन बौद्धकाल में धर्म और धर्मग्रंथों के बिगाड़ के चलते लिंग को गलत अर्थों में लिया जाने लगा जो कि आज तक प्रचलन में है।

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