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हजारों शब्दों से ज्यादा प्रभावी रहीं त्रासदी का पर्याय ये तस्वीरें

   |  Mon, 09 Jul 2018 02:05 PM (IST)

भूख से दम तोड़ते बच्चे की मौत का इंतजार करता गिद्ध। न्यूयॉर्क टाइम्स के फोटोग्राफर केविन कार्टन ने इसे 1993 में क्लिक किया था। इसे पुलित्जर पुरस्कार मिला था।

अप्रैल 1995 में अमेरिका के ओखलाहोमा सिटी में आतंकी ट्रक की बमबारी के बाद इस बच्ची को निकाला गया। यह तस्वीर दर्द की विभीषिका को जाहिर करती है।

अयलान कुर्दी की मौत ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। आतंकी संगठन आईएस के कब्जे वाले इलाके से भागते हुए यह बच्चा काल के गाल में समा गया था।

1984 में भारत में हुआ भोपाल गैस कांड आज भी लोगों के जेहन में है। हजारों लोग रात में सोते हुए मौत के मुंह में धीमी मौत मर गए। इस बच्ची की तस्वीर विभीषिका को बताने के लिए काफी है।

जापान की सेना की बर्बरता को दिखाती हुई इस तस्वीर को सितंबर-अक्टूबर 1937 में प्रकाशित किया गया था। जापान ने शंघाई साउथ रेलवे स्टेशन पर बम गिरा दिया था।

करीब 20 सालों तक वियतनाम, लाओ और कंबोडिया की धरती पर लड़ा गया सबसे भीषण युद्ध था।

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