बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

रेलवे लाइन के ऊपर बने लालखदान ओवरब्रिज पर बुधवार से ट्रैफिक फिर शुरू हो गया। रेलवे ने अपने हिस्से के काम में बड़ी तकनीकी खामी कर दी थी। इससे ओवरब्रिज के गिरने का खतरा था। इस खामी को सुधारने में चार माह का समय लग गया।

मस्तूरी की ओर जाने वाली सड़क पर लालखदान ओवरब्रिज का निर्माण राज्य के सेतु निगम और रेलवे ने संयुक्त रूप से किया है। सेतु निगम ने ओवरब्रिज के 756 मीटर हिस्से में काम कराया और रेलवे ने मात्र 60 मीटर हिस्से में काम किया था। जुलाई माह में दोनों ने ही काम पूरा कराकर ओवरब्रिज पर ट्रैफिक चालू भी करा दिया था। इसके एक माह बाद पता चला कि रेलवे ने अपने हिस्से में गर्डर के पास बड़ी तकनीकी खामी कर दी है। इससे ओवरब्रिज के गिरने का खतरा पैदा हो गया। गनीमत यह रही दुर्घटना से पहले इसका पता चला गया और आनन-फानन में ट्रैफिक बंद कर मरम्मत शुरू कराई गई। चार माह तक तकनीकी दिक्कत दूर करने के बाद आखिरकार बुधवार को इसे फिर चालू किया गया है। यहां गर्डर को नए सिरे से बिठाया गया है। अब फिर से इस पर हल्के और भारी वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है। शुरुआत में रेलवे के अधिकारी इस पर निगरानी बनाए हुए हैं।

रोज सैकड़ों लोग थे परेशान

लालखदान के सामने से रेलवे की सबसे व्यस्त लाइन गुजरती है। यहां हर 10 मिनट में ट्रेन आती-जाती रहती है। इससे रेलवे फाटक बहुत कम समय के लिए खुलता है। यही कारण है कि रेलवे और सेतु निगम ने यहां छह साल पहले ओवरब्रिज निर्माण प्रस्तावित किया था। पहला तो काम में बहुत विलंब हो गया, उसके बाद रेलवे के घटिया काम के कारण तकनीकी खामी आ गई। इससे रोज सैकड़ों लोग रेलवे फाटक में फंस रहे थे। ओवरब्रिज पर ट्रैफिक चालू होने से मस्तूरी, जांजगीर-चांपा आदि जगहों की ओर जाने वालों को काफी राहत मिली है।

फ्लाईओवर पर एक नजर

काम की स्वीकृति 21 फरवरी 2013

पूर्णता की तारीख 20 नवंबर 2014

लागत पहले 12.50 करोड़

बढ़ी लागत 32 करोड़

लंबाई 818.07 मीटर

रेलवे का हिस्सा 60 मीटर

सेतु निगम 758 मीटर

लागत ढाई गुना तक बढ़ानी पड़ी

लालखदान ओवरब्रिज का काम स्वीकृत किया गया तो इसकी लागत 12.50 करोड़ रुपये थी। रेलवे और सेतु निगम की लापरवाही और विवाद के कारण इसका निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ। इससे काम की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी होती गई। काम पूरा होने तक लागत ढाई तक बढ़ गई। इसके बाद भी तकनीकी खामी आ जाने से लोगों में भी काफी नाराजगी थी।

सरकार ने बदला नियम

काम में लेटलतीफी का ठिकरा अधिकारियों ने जमीन विवाद और इसी तरह की समस्याओं पर फोड़ दिया। इससे लागत बढ़ती चली गई। कुछ और काम में भी इसी तरह की समस्या बताने पर सरकार ने नियम ही बदल दिया। अब जमीन की व्यवस्था करने के बाद ही निर्माण कार्य की स्वीकृति और उस पर काम करने का नियम बनाया गया। ताकि बाद में विवाद के बहाने सरकारी खजाने पर बोझ न बढ़े।

रेलवे की ओर से जो तकनीकी दिक्कत थी, उसमें सुधार कर लिया गया है। बुधवार को हमने ओवरब्रिज पर से ट्रैफिक शुरू कर दिया है।

साकेत रंजन

सीपीआरओ, रेलवे

Posted By: Nai Dunia News Network