जयपुर (मनीष गोधा)। कश्मीर मे नियंत्रण रेखा (एलओसी) से 10-12 किलोमीटर पहले का मच्छल इलाके से राजस्थान घूमने आए 20 स्कूली छात्र बड़े गर्व से कहते है कश्मीर जन्नत है, आकर देखो कभी। आपके यहां ज्यादातर चीजें इंसान ने बनाई है, हमारे यहां सब कुछ कुदरत का बनाया हुआ है।

भारतीय सेना के सद्भावना मिशन के तहत मच्छल इलाके में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर दीपक कविया 20 स्कूली छात्रों को राजस्थान घुमाने लाए है। मेजर कविया खुद जोधपुर के है। बच्चों को भी जोधपुर और अजमेर घुमा चुके है, अब जयपुर घुमा रहे है। सभी छात्र मच्छल के हाई स्कूल के नौवीं से 12वीं तक के छात्र हैं। इनमें से कोई कभी श्रीनगर की दहलीज पार नहीं कर पाया है। कई तो ट्रेन मे ही पहली बार बैठे हैं। बात करने में थोड़ा हिचकते है, लेकिन कुछ देर बाद सामान्य हो जाते है।

राजस्थान की गर्मी से ये थोड़ा परेशान तो है, लेकिन कश्मीर से बाहर की दुनिया देखने की चाहत के आगे सब कुछ भूल गएहै। इनके साथ आए इनके स्कूल के टीचर हिलाल अहमद कहते है, यह अच्छी बात है कि इतनी सी उम्र में ये बच्चे बाहर की दुनिया देख पा रहे है। हमें तो यह मौका हीं नहीं मिला था। हिलाल इतिहास में एमए हैं और राजस्थान वो भी पहली बार आए है।

इन छात्रों से जब हमने इनके इलाके में विकास की बात की तो बोले विकास तो कौन नहीं चाहता। बारहवीं में पढ़ रहा इरफान शेख टीचर बनना चाहता है और यह ख्वाहिश नवीं में पढने वाले सबसे छोटे जाकिर से लेकर कई छात्रों की है। वो कहते है कि हमारे यहां शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नही है। हम सरकार से सबसे पहले शिक्षा की अच्छी सुविधाएं चाहते है। बाकी सब तो होता रहेग, लेकिन वहां एक अच्छा काॅलेज हो, यहां जैसे एक-दो अच्छे संस्थान हो तो बहुत बडा काम हो जाएगा।

दसवीं में पढ़ने वाला अल्ताफ अहमद डाॅक्टर बनना चाहता है। उसका कहना है कि हमारे इलाके के गरीब बच्चे बारहवीं से आगे पढ़ नहीं पाते है, क्योंकि काॅलेज कुपवाड़ा में है। लड़कियों तो मुश्किल एक प्रतिशत ऐसी है जो काॅलेज जा पाती है। नौवीं कक्षा में पढ़ रहे जाकिर का कहना है कि मेरा लक्ष्य सिर्फ एक अच्छा टीचर बनना है तो अपने इलाके के लोगों को अच्छे ढंग से पढ़ा सकूं। बाॅलीवुड की फिल्में सभी देखते है।


इस बार जबर्दस्त उत्साह था

इन बच्चों को इस सद्भावना मिशन पर ले कर आए मेजर दीपक कविया का कहना है कि साल 2009 के बाद यह मिशन 2018 दोबारा शुरू हुआ था। पिछली बार 24 बच्चे आए थे और इन बच्चों ने वहां जाकर जो फीडबैक दिया उसका नतीजा यह था कि इस बार हमारे पास 60 नाम आ गए। लेकिन चूंकि ज्यादा बच्चों को नहीं ला सकते थे, इसलिए सामान्य ज्ञान की एक बहुत सामान्य परीक्षा रखी और इसके अंकों के आधार पर 20 छात्रों का चयन किया।

मेजर कविया ने बताया कि इस यात्रा के जरिए हम इन्हें राजस्थान की संस्कृति, कला, हेरिटेज, औदयोगिक विकास, शैक्षणिक विकास आदि से परिचित करा रहे है। इसके लिए इन्हें सिर्फ पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि बड़े काॅलेज, मार्बल फैक्ट्री, होटल मैनेजमेंट जैसे संस्थान अदि भी दिखाए जा रहे हैं ताकि इन्हे अपने करियर के लिए विकल्पों की जानकारी भी हो सके।

कविया ने बताया कि सेना हर साल इसी तरह अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को चुन कर देश का अलग-अलग राज्यों का दौरा कराती है। इनमें हम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को लेकर आते है और उन्हें देश को देखने का मौका देते है।