मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में फसलों को नुकसान पहुंचा चुके टिड्डी दलों पर एक बार तो किसी तरह से नियंत्रण हो गया है लेकिन अब टिड्डी के अंडों से निकल रहे उसके बच्चे चिंता का कारण बन रहे हैं। इन्हें फाका के नाम से जाना जाता है। ये राजस्थान में कुछ जगहों पर नजर आ रहे हैंं और कहीं कहीं बड़े होकर टिड्डी दल के रूप में भी दिख रहे हैं। राजस्थान का कृषि विभाग पूरे राज्य में इनका पता लगाने के लिए सर्वे करवा रहा है और इन्हें उसी समय नष्ट भी किया जा रहा है।

राजस्थान पिछले वर्ष नवम्बर से टिड्डी दलों के हमले से परेशान है। उस समय इन पर दो माह में काबू पा लिया गया था लेकिन इस वर्ष अप्रैल से टिड्डी दल सक्रिय हैं और इस बार तो टिड्डियों ने राजस्थान ही नहीं गुजरात, पंजाब, मध्यप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली तक हमले किये हैं। अब जाकर इन पर काबू पाया गया है। हालांकि अभी भी बीकानेर, गंगानगर, जोधपुर में कहीं कही। टिड्डी दल देखे जा रहे हैंं और चिंता अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि अपने हमलों के दौरान टिड्डियों ने यहां बड़ी मात्रा में अंडे भी दिए हैं और अब इनसे बच्चे निकल रहे हैं, जिन्हें फाका कहा जाता है। अब यही फाका बड़े होकर टिड्डी दल के रूप में यहां वहां नजर आ रहा है।

कृषि विभाग के पौध संरक्षण उपनिदेशक सुवालाल जाट के अनुसार टिड्डी एक बार में 80 से 100 अंडे देती है और पूरे समय जीवित रहे तो 250 तक अंडे दे सकती हैं इस बार आये टिड्डी दलों में लाखों टिड्डियां थीं। अब जो टिड्डी दल दिख रहे हैं वो ज्यादातर अंडों से निकले फाका ही हैं। इस के बारे में पता लगाने के लिए विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में सर्वे किया जा रहा है। इनका पता लगाना भी आसान नही है क्योंकि टिड्डी मिट्टी के अंदर अंडे देती है, अच्छी बात ये है कि अंडे से निकलने के बाद बच्चे कुछ समय तक आस पास ही मंडराते रहते हैं। फाके के सर्वे का काम सभी जिलों में चल रहा है। इसके लिए विभाग के कंट्रोल रूम के साथ ही 20 से 25 सर्वे टीम प्रत्येक जिले में सक्रिय है। यह टीमें किसानों के साथ ही जनप्रतिनिधियों, पंचायत स्तर के अधिकारियों और राजस्व विभाग से संपर्क करके फाके की सूचना जुटाती है। सूचना एकत्र करने के साथ ही उस पर तत्काल नियंत्रण की कार्रवाई के लिए केमिकल का छिड़काव भी किया जा रहा है।

टिड्डी दलों के बड़े हमले की चेतावनी के बारे में उन्होंने कहा कि इसके बारे में निश्चित रूप से कुछ नही कहा जा सकता, क्योंकि पाकिस्तान सहित कई देशों में इनकी ब्रीडिंग की सूचना है। अब मौसम और हवा का रुख क्या रहता है इस पर सब कुछ निर्भर करेगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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