जयपुर। जयपुर के पास टोंक जिले में जानकीपुरा की दबेडिया नाड़ी गांव में खजाने की बात को अब तक पुलिस अफवाह बता कर टाल रही थी, लेकिन जब पुरातत्व विभाग के अफसरों ने पुलिस को मिले दो सिक्कों की जांच की तो पता चला कि ये सिक्के गुप्‍तकाल के हैं और इनकी कीमत का अनुमान लगाना मुश्किल है। पुरातत्व विभाग ने सोने के सिक्कों की जांच के बाद नाड़ी में प्राचीन खजाना होने की संभावना जताई और इस क्षेत्र के संरक्षित करने की बात कही है।

इस गांव में ग्रामीण पिछले चार माह से खजाने की खोज कर रहे है। गांव वालों का कहना है कि नाड़ी में पत्थर की खान की खुदाई में निकाली गई चार फुट मिट्टी को पाल के रूप में डाला गया था। जुलाई में बरसात से पाल से मिट्टी हटने पर स्वर्ण मुद्राएं बाहर चमकने लगी। सितंबर में सिक्के मिलने का मामला फैला ओर नवंबर-दिसंबर में दूर-दूर के लोग यहां सोना तलाशने एकत्र होने लगे।

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) जयपुर के अधिक्षण पुरातन मनोज द्विवेदी व सहायक पुरातनविद डॉ. गोविंद सिंह यहां पहुंचे। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने एक किलोमीटर की परिधि में प्राचीन काल में उपयोग की जाने वाली ईंटों के टुकड़े व हड्डियों के अवशेष सहित अन्य वस्तुएं संकलित कीं। जांच के बाद अधिकारी बोले कि यहां खजाना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सिक्के बरामद होने के बाद अब पुिलिस भी सक्रिय हो गई है। पुलिस ने आसपास के इलाके के करीब एक दर्जन लोगों को चिह्नित किया है, जिन्होंने सोने के सिक्के बेचने में दलाल का रोल निभाया था। थानाधिकारी ने बताया है कि जल्दी ही दलालों को गिरफ्तार कर सिक्के खरीदने वालों का पता लगाया जाएगा।

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