Asteroids News : राजस्थान के जालोर जिले के सांचौर कस्बे में शुक्रवार सुबह एक उल्का पिंड गिरा। आसमान से गिरने की वजह से यह जमीन में करीब चार-पांच फीट की गहराई में जाकर धंस गया। इसे देखने बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। पुलिस ने प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इसे वहां से हटाकर सुरक्षित रखवाया। पुलिस के अनुसार किसी धातु के समान नजर आ रहा यह उल्कापिंड 2.788 किलो वजनी है।

सांचौर के थानाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि गायत्री कॉलेज के पास मार्ग पर आसमान से तेज गर्जना के साथ एक चमकदार वस्तु नीचे गिरी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम को काले रंग की धातु का टुकड़ा जमीन में धंसा हुआ नजर आया। यह पिंड करीब चार से पांच फीट की गहराई में जमीन में धंसा हुआ था। गिरने के बाद यह पिंड काफी गरम था। बाद में उपखंड अधिकारी व पुलिस उपाधीक्षक भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि यह उल्कापिंड जैसा है। इसे एक जार में सुरक्षित रखवा लिया गया है और विशेषज्ञों को दिखाया जाएगा। उधर, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने आसमान से तेज चमक के साथ एक टुकड़े को गर्जना के साथ नीचे गिरते देखा और पुलिस को सूचना दी।

यह होता है उल्का पिंड

जानकारों के अनुसार उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृृथ्वी तक पहुंचता है, उसे उल्कापिंड कहते हैं। प्रत्येक रात्रि को उल्काएं अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं, लेकिन इनमें से पृृथ्वी पर गिरनेवाले पिंडों की संख्या बहुत कम होती है। पृृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं, उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में टूटते हुए तारे कहते हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

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