रंजन दवे. जोधपुर। ज्योतिषीय गणना के आधार पर राहु-केतु ने 23 सितंबर को राशि परिवर्तन किया है और अब अपना प्रभाव देना शुरू कर दिया है। 10 सितंबर से मंगल के वक्री हो जाने की स्थिति आगामी 66 दिनों तक रहेगी, और इसी वक्री अवस्था में ही मंगल चार अक्टूबर से मीन राशि में प्रवेश करेगा और फिर 14 नवंबर को मार्गी होंगे। ये स्थिति राजस्थान प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत के लिए लाभप्रद रहने वाली है। राहु-केतु के राशि परिवर्तन से राहु इनको और आगे ऊंचाई पर लेकर जाएगा।

ज्योतिषीय गणना के जानकार और कुंडली विशेषज्ञ मूलतः जोधपुर निवासी अनीश व्यास के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुंडली के अनुसार उनके ग्रह अच्छा समय बता रहे हैं। राहु का राशि परिवर्तन उनको और उन्नति दिलाएगा। जोधपुर में 3 मई 1951 प्रात:9:30 बजे जन्मे गहलोत का जन्म मिथुन लग्न व मीन राशि में हुआ है। उनका लग्न 12 डिग्री पर अपने श्रेष्ठ अवस्था में है, जो की व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूती देता है। अतः देखने को मिलता है कि अशोक गहलोत कोई निर्णय दिल से नहीं करते हैं। साथ ही लिए गए निर्णय में परिवर्तन भी आसानी से नहीं करते हैं।

ज्योतिषाचार्य अनीश व्यास ने मुख्यमंत्री की कुंडली अध्य्यन के बाद बताया कि इस कुंडली में 4 ग्रह स्वराशि के है। जिनमें ( मंगल / गुरु / शुक्र / राहु ) और सूर्य उच्च के है। इन्हीं ग्रहों के प्रबल योग ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री का पद दिलाया था। इसी कारण से ग्रहों के राशि परिवर्तन के दौरान हुई हलचल को भी अशोक गहलोत झेल गए और गतिरोध के बीच अपना औहदा बरकरार रखा। कुंडली की रिसर्च के आधार पर अशोक गहलोत के ग्रह इस समय अच्छे हैं और उनके लाभ के पद का फायदा मिलता रहेगा। राहु भी इस कुंडली में स्वराशि के है और नवमांश में है। राहु-केतु के राशि परिवर्तन से राहु इनको और आगे ऊंचाई पर लेकर जाएगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु-केतु ने 23 सितंबर को राशि परिवर्तन किया है और अब अपना प्रभाव देना शुरू कर दिया है। राशि परिवर्तन से मंगल वक्री हो गया था वक्री अवस्था में ही 4 अक्तूबर को मीन राशि में प्रवेश करेगा। मुख्यमंत्री गहलोत भी मीन राशि के जातक हैं।

ज्योतिष का एक बेसिक और अच्छा तथ्य हैं कि वक्री ग्रह बलवान होता हैं। तर्क यह कि वह वक्री हो कर जिस राशि की तरफ बढ़ेगा उसका और जिस राशि से बढ़ेगा उसका दोनो का बल प्राप्त होता है।

Posted By: Arvind Dubey